सब को यही सन्मति देता भगवन
सारा दिन तेरा मेरा
रात कहा रह गयी
यहा मेरी अनु-मति के बगैर कोई आ नही सकता
इसका बल मत
कंस का भरपूर घर अदर-बाहर आने की
आज़ादी ख़ाली कस को नही दे सकता
फिर यह मेरी(मेरा) किसकी मति से
दुयिया के समाज की तूतू मै मै मे खडा
no 1
मौत के मूह मे जो गया अदर वोह बाहर कहा निकला
तो लड़ते रहो दुयिया के समाज की तूतू मै मै
के भगोड़ो भरपूर भाया पिटला
दुयिया के समाज की तूतू मै मै का मूह कहा होता है
जन्म/मरन का मुँह gut ब्रह्माण्ड की ख़ाली सृष्टि की गोदी
किसका क्या नाता छूटा किसका भरपूर भूट्टा
आखे खुली आखे बद एक फिसला फूटा


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