_h@ out th-er is wit()in u
y _ood ma()ch a-li()n
भरपूर _ord
_h@ out th-er is wit()in u
y _ood ma()ch a-li()n
भरपूर _ord
बुरे वक़्त में भार(भरपूर)पका पैसा
काम()आया अंदर भरपूर लाया
ने gut गोदी को
बुरा भरपूर
दिखाया
y in()id u ne_er un_er-s()ood
nothing ne_er no u
राहु ने सोमरस तो निगल लिया
लेकिन गले से निचे नहीं उतरा
न ही उतरेगा किसी भी युग में
धढ़ क्या करेगा शरीरो के बगैर
तो बोलो आधे की ख़ाली खैर
_h@ _ach u thin_
th@ _eed
y well-being
in()id u is _ol str8g_
in_est y _ell-_ing
for _ol u s’ood *_ing
s_eep _un_g-y
y in()id u _ill _ee y du()ies
not _ur-den as thin_ it
_an acco()p_ish for th@
2 i-m-p()ov y in()id
u _if
a fo__ish is th()ow()ing
a भरपूर _ait is _ach()ing
u la_e un()not ()ate
y f@
अनगिनत सास की भरपूर किताब
आज ही होगा भरपूर ताव का हिसाब
दिल थाम के रखो अदर हिज़ाब
इधर उधर लेगा एक एक का नवाब
बहार न निकले ज़ुबान का रुबाब
देखो अंदर ही रहे इत-काम का
भरपूर जवाब
बस करो आधे
और नहीं वाह देह
gut गोदी को न मिला ख़ाली तेह
कौन भगाये भरपूर भय
रात-दिन न जगे ख़ाली लेह
आप ही करो ख़ाली मेह
असुरो को घूंघट ओड़ के रखना चाहिये
gut गोदी के अंदर
उससे भरपूर आखे फट जाएगी
और घु-घट को भी पहाड देगी
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