a _hed_ing s_in or gut _urface()all _pin
_er-ving _ong no_er ever-y1 level _in
a_on u ne_er in(out)id _in
सास के अदर s_an_ard _ar ख़ाली दर्द होते है
so u _av to _ook in()id _other pe()ple’ weillage
for ever-y1-thing to _ing _ig _in
a _hed_ing s_in or gut _urface()all _pin
_er-ving _ong no_er ever-y1 level _in
a_on u ne_er in(out)id _in
सास के अदर s_an_ard _ar ख़ाली दर्द होते है
so u _av to _ook in()id _other pe()ple’ weillage
for ever-y1-thing to _ing _ig _in
अब लताओं
आप कहते है की आ-दे पाप पे
नहीं नहीं ख़ाली मुखड़े का माप मे
अदर न आये भरपूर जू-लाप जे
जब सास के अदर के काम कम-जोर है
तो बाहर भरपूर काम ढूढती आखे भरपूर मु()ड़ा _or है
o babi baabi baaaaabi
बच्चे क्या शरीर होते है इधर उधर उछाले अदर उछलते आ
भरपूर भछाल भय
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ਡਗਰ ਅੰਦਰ ਹੀ ਡਡੇ ਡਾਇ ਡਾਡੇ ਡਾ
श्री गणेश को विद्या-पढ़ाई का भगवन मानते है
और
सास के अदर विदाई की आई के आड़े नही भरपूर काटे
हठी दाते दिख(आ)वे के दाते दा
दिखावा क्या पड़()दा दा
किराये के घरो मे शरीर क्या खरीदे होते है
तक(दी)रीर कैसे खरीद सकते है जो आधा जन्म की बद()लत है
सास तो शरीर का मर()वीर बेच के भरपूर सोती है ताकि रात की
घुटी बात का बुरा भरपूर दामाद को दिन मे न यहसूस हो
आधे की सृष्टि मईया की गोदी में
दुनिया के सासो के भरपूर अमीर-गरीब का अदर एक साड़ा
तो सास ही बिना ()माने भरपूर घुट-घुट के अदर भरे एक भाड़ा
गोदी का अंदर तो है ख़ाली छोटा छूटा नाड़ा
ख़ाली ही रहे अंदर अ-खाड़ा
रामा, श्यामा आओ आमा
बैठे देखे ख़ाली बल की लकीरो
की सांसो का ख़ाली _ra()ma रा-ड़ा
अच्छा अच्छा इसीलिए हाथ जोड़ के
खड़()पूर ही खड़े खाते खा
तुम्हे पहले ही y_ar_ing दे देते है
तुम-हारा भरपूर ह()हारा इधर उधर का
भरपूर बिगाड़ बही बाता
fu_l _oon की जोड़ी जा
एक-ing से बनायी बा
_ull _ur(re)vive o करेगी दुनिया के
एक-एक का ()जा
कमजोर सासे अपने अदर इधर उधर को नही खाक खर खक्ति
तो क्या तूतू मे मे की दुनिया के इक इम्तिहान की खाक नि(वा-ले)खारेगी
अन-गिन()त आधा जन्म के अदर
सास को अदर की इधर उधर की बीमा(या)रियो
ने भरपूर भेर भरा भय-कर
अब उससे ऊपर क्या होगा
ख़ाली कं-कर का अन्न-कर
gut के अदर जल-कर
दामाद तक पही पहुचेगा बल-कर
सुरग मे ही आयेगा उछल-कर
ज़ुबान पे मचला भरपूर चल-कर
भरपूर सास के घर का अनपढ़ नही पड सकता ख़ाली अन्न का धड़-धड़
तुम-हा-रा सास की भरपूर भक्ति का एक निवाला
अदर नही लाया भू-ताला
निवा रह गया मोह-भाया का जाला
इधर उधर बिछाये उचा भरपूर भाला
तूतू मे मे की एक दुनिया के समाज के कधे तो काम-जोर भरपूर है
तो अदर भी तो टके-टके बधे सासो के भरपूर चोर सवा-सूर है
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