सृष्टि गोदी के अंदर
एक एक ने हर सदी के अंदर की दुनिया ही बदल डाली
इसी लिये अपवित्र असुर घर-घर का बदला भरपूर डाल वाली
ਤਦਿ ਤੇ ਸੰਸਾਰ ਵਿਚ ਕਿੰਨੀਆਂ ਦੁਨੀਆ ਪੈਦਾ ਹੋਈਆਂ ਤੇ ਮਿਟ ਗਈਆ ਸਵਾਲੀ
ਇਹਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਨੇ ਬਦਲੇ ਦੀ ਲਹਿਰ ਪੂਰੀ ਇਕ ਭਰਪੂਰ ਕਵਾਲੀ
सृष्टि गोदी के अंदर
एक एक ने हर सदी के अंदर की दुनिया ही बदल डाली
इसी लिये अपवित्र असुर घर-घर का बदला भरपूर डाल वाली
ਤਦਿ ਤੇ ਸੰਸਾਰ ਵਿਚ ਕਿੰਨੀਆਂ ਦੁਨੀਆ ਪੈਦਾ ਹੋਈਆਂ ਤੇ ਮਿਟ ਗਈਆ ਸਵਾਲੀ
ਇਹਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਨੇ ਬਦਲੇ ਦੀ ਲਹਿਰ ਪੂਰੀ ਇਕ ਭਰਪੂਰ ਕਵਾਲੀ
आज का भरपूर सत्य एक वचन सुन के
अदर के अनगिन्नत जन्मो का महा-प्रलय
कैसे ख़ाली करेंगे
जिस-तिस मनुष्य का मन ही अदर-बाहर के इधर-उधर की
भरपूर उषा की शय हो
वोह क्या
सृष्टि गोदी के अंदर का ख़ाली होगा
जब pre_ent मे यह हाल है y-0-s in()id u का
तब 0 की a_sence मे क्या होगा
s_am_ede
आधे है पूर्ण मंत्र का इधर-उधर का ख़ाली मात्रा
आधा भगाये भरपूर तत्र का इधर-उधर का भरपूर यात्रा
आधे का श्राप हो या फिर काली माता का
लात तो एक के ऊपर ही रहेगी
धड़ा धड़ धड़-धड़ खड़े हो रहे है हर सास के अदर
बिना चैन के
बीमा(या)रिया तो सास के तल पर भरपूर फैली हुई है
और अब गहरी भी हो जायेगी भरपूर
ऊपर या नीचे
(दोनो ही)
तीनो मुह तो अदर बद ही रहेगे
अब आएगा प्रलय
दामाद होगा ख़ाली निलय
सास सहेगा ख़ाली मलय
a wit()in d_s-f-un_tional fa_il-y is
_ause of man-is_e-station of on wor_d _ause
_eeds hol f-unctional _ull y-0-s in()id u _aw()s
n-ever s_eal _heat vile _t_nding _ack of adha c_alf
तीनो लोक काँपते है
खाली वीर के आधा-आधे महा आम से
तूतू मे मे की दुनिया मे कोई नही एक का-पता
(काला-पता हो गया)
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