भरपूर निवाला नहीं दिवाला
तो क्या सास की बहार के अदर का घरवाला
भरपूर निवाला नहीं दिवाला
तो क्या सास की बहार के अदर का घरवाला
is wiw o _ull re_aining in()id _ise _ull
क्या खोया क्या पाया
जो न सोया ख़ाली न बोया
भरपूर ही ढोया ख़ाली न धोया
y-0-s in()id u de_erve to be t()eated with in()id res_ect
——
a respect is to ob(edient)serve & obea
(quiet emanating wiw o rae)
c_ose eie qu_etlee
in(out)id emp()ee hae
a che_ing bite in()id _outh with qu_et y-0-s in()id u is
0 con-_id-ered a grati()ude to nature babies
आधे की ख़ाली आंखे श्राप है
अपवित्र असुर अदर के बाप है
इधर उधर के भरपूर आप है
बिन मा के बचे अदर के पाप है
आधे की ख़ाली ज़ुबान की साधना के अ()लाप है
जिसको सृष्टि गोदी की ख़ाली चुपी का एहसास नहीं
उसे अपने अंदर की शांति के परिश्रम का ख़ाली विश्वास नहीं
भरपूर सास के भरपूर दामाद के पास सब कुछ भरपूर है
बस नहीं है तो अच्छी in()id gut ख़ाली प्रकृति
जिससे सृष्टि गोदी के सुर अंदर ख़ाली सहज रहते है
सृष्टि गोदी में भरपूर ज़ुबान के ताले की चाबी को रजा नहीं मिलती
और फिर तूतू में में की 1 दुनिया तो भरपूर सास के दामाद की सजा पर ही टिकी है न
तो फिर काली माता की बाहर दरशाती लम्बी ज़ुबान का कोई लेना देना नहीं है गोदी से
यह तो भपूर दुनिया की बनायीं हुई दाती है जो भरपूर को असीसे देती है
8 _ill_on धढ़ कैसे टिक गये काली माता के गले में
और भरपूर का निवाला गले से नहीं उतरता
तूतू में में की दुनिया के एक सत्य वचन के लिए में
सृष्टि गोदी के तत्व का त्याग अंदर ही कर दूंगा
यह अकेला ही खड़ा हो के ज्ञान प्रपात कर रहा है
कहा का
You must be logged in to post a comment.