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क्या पूरे

च()-दर-मा को गिल्टी-फिल्टी

अदर हो दमा भरपूर गया

आज कुछ नही भर भरपूर सकता

()क्कन धु-ठुला ही रह आया


यह तो पीछे का भरपूर करता धरता माया

त्यार

ना तुमने कोख मे रह खुश नही सीखा


जो हम तुम्हे आज सिखाये


लाते अंदर ही मरवाते है


बाहर दिखाने से गोदी ही रोती है


९ महीने रह के क्या किया


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(अच्छा अच्छा ()डे तोड़ रहे थे )


यह लो
लाते भी बीमा()र


अब शुरू से अंत भी त्यार

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अब इस बल का क्या मत है


मध्य म()य झूठ नही बोलता या बुलाता


म()य नही अदर लेटता


गाठ को झूठ ही दीखता


बल मत तो एक ही रहेगा


म()य और केंद्र भीतर ही होते है क्या

आधा अंश का कण

जब सूर्य का आधा कण गोदी के अंदर आ जाए
तो क्या होगा


भरपूर गलेगा और ख़ाली घुलेगा


ख़ाली अनु का गोदी मे मान नही रखा

तो फिर आज भरपूर आन()धान की

सास अदर कैसे गलोगे

अदर उठे के बाहर लुटे


जब सास को अंदर मौत आती है तो

बाहर के शरीर को दफना या जला दिया आता है


जब भरपूर सास मर के अंदर ही ख़ाली जाग जाती है

उसके अंदर के भरपूर धढ़ अपने आप ही पूरे धढो को दफना देते है

या फिर ख़ाली अग्नि मे जल आते है

क्या हुआ

तुम-हरी सास मर-मार-मर के भी भरपूर भारी बीमा()री

आधा घर का स् -सार

यह क्या-क्यो लगा रखा है ऊची ऊची


अपवित्र असुरो ने अपने अदर ही भरपूर मदर


मनोरजन का अभाग्य निर-जन


शुरू करो दिन रात विसर-जन


अत ना भरे भरपूर दत-म()जन