डर खडी दर है के बैठी है
ख़ाली है तो निराली घर
अंदर दिवाली है
डर खडी दर है के बैठी है
ख़ाली है तो निराली घर
अंदर दिवाली है
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आज की आंखे बंद करने का फायदा कोई क्या है
—–
व()न के भीतर शिकारी
है अंदर के भीखारी
आये है लूटने gut की क्यारी
अब तो एह कुड़ी नहीं 2()tal प्यारी
आई है कल के काल की ठुमारी
साध लो अंदर भरपूर बीमारी
अंदर बाहर ख़ाली खू-मारी
आ गई e-नर की ख़ाली कुमारी
सफ़ेद घोड़े पे सवार ख़ाली निराली हमारी
—–
बूंदियो का पहरा-वा ख़ाली
दोगुना बिठा दो
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re()em_er adhe’
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आधे के आधा की कहा-नी है ख़ाली
नाम- -निशान की बाणी ख़ाली
सांसे जो वारे अंदर ख़ाली
ओहि e-नर-दानी की ख़ाली रखवाली
ख़ाली पढ़ाई लिखाई तो
ख़ाली को ही सारा भर्ती है
ख़ाली समझ के अन्न-पड़ भी
ख़ाली रहते है
ख़ाली षुरू
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रोगी-भोगी-योगी
in()id सास
an emptee within child’
_o_tur is gut alon
mother nature
in()id emptee
ever()here
gut मईया के पास हर रोग का इलाज है
तभी तो सारी बूंदिया निरोग्य है
ख़ाली कोख के अंदर
तुम्हारा भगवन क्या तुम्हारे भरपूर
तन को ख़ाली होने से बचाता है
आधा भरी हरकत सास को
अंदर ही गिरा देगी
&
आधे ख़ाली साँस की बरकत
gut मईया की गोदी को
ख़ाली सुर अंदर स्वार लेगी
साथ समुन्दर पार करके ख़ाली आधा आया है
अंदर भगाने का आधे आम ख़ाली पाया है
गुलो का गम gut गोदी भरपूर गवाया है
सरेआम अंदर ही सर का ख़ाली सरमाया है
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