बन्दि

जुबान से ख़ाली अखर तो

निकले नहीं निकलते

(घर से निकलते ही कुछ दूर चलते

ही गोदी में है ख़ाली धर)

और अब भरी जुबान को बन्दी

बना के आखो के सामने रख दिया है

कौन सी बन्दि है येह

दायी कि बायी

रोन-दे

दुनिया के धार्मिक स्थानों के अंदर नंगे पेरो का दिखावा करते है

और

gut गोदी के अंदर भरपूर जूतों के पेहरावे से सारा रोंदते है बूंदियो को

रोन-दे

भरपूर दुनिया की रौनके

मिल-भगत

ओह सब तो ठीक है


पर सास के दामाद के भुगतान में देरी क्यों


अब एह भी लेलो


देरी को न मिले अंदर की हेरा फेरी की

मेरी की इधर उधर की देरी