जितनी खुली ज़ुबान उतनी जूठी जस जात जहाज जहान
जा खू()ली रात री रात
बाहर दिखावे दी दडपूर दिज्जत
और अदर विस()की क्यो कही कि-काली कि-जत
जितनी खुली ज़ुबान उतनी जूठी जस जात जहाज जहान
जा खू()ली रात री रात
बाहर दिखावे दी दडपूर दिज्जत
और अदर विस()की क्यो कही कि-काली कि-जत
जिस ख़ाली लात ले गोदी का संतुलन सुरक्षित
उस ख़ाली खाट खो खा छू छक्के छार छ-वानी
पूछ पया पडी पेरो पी परायी पुरानी
घर घर की घडपूर गहानी
गोदी की न चले मधानी
दूयीया दूह दिखाई दे दरानी
अदर उतरी चौध(चतुर)रानी
रिश्ता बाहर हुया रात बनी रानी
दिन मे चेहरा एक नू()रानी
गोदी के पास न आस है न पड़ोस पा प्यास
रिर्फ़ आधे ख़ाली रास
तुम छू-छाते क्यो हो हमसे
हम-आरे आस आरा
न्वाब नहीं नया नहा(या)रा
ਜੋ ਵੀ ਕੀਤਾ ਰਬ ਕੀ ਕੀਤਾ
ਇਸ ਭਾਣੇ ਵਿਚ ਦੂਯੀਯਾ ਦੇ ਇਕ ਇਕ ਦਾ
ਸਲਾ ਮਸ-ਵਰਾ ਪੂਰਾ ਪਿਯਾ ਪਾ
ਸਿਰਫ ਮਾ ਨੇ ਈ ਰਬ ਨੂ ਛਡਿਆ ਨੇ ਮਾ ਨੂ ਛਡ ਛੂਟਾ
ਰਬ ਦੀ ਬਨਾਇ ਦੂਯੀਯਾ ਵਿਚ
ਮਾ ਨੀ ਮਿਲਦੀ ਅਸੁਰਾ ਨੂੰ
ਇਹ ਕਿ
ਇਹ ਵਰ ਕਿਊ ਮਸਿਯਾ ਮੋਯਾ
ਤਦਿ ਤੇ
क()मो का कमजोर क()ज कूर काढ़ा
अंदर गाठे गाये नड़िया निढाल नाड़ा
पेटी पडायो बेश बचायो
अच्छा अब कलयुग के अंतिम पड़ाव पी
पेटिया देश दे दिये दहाडने देखेगी
भरपूर पैट पा पसार
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तुम-हारे घर मे घेटो घो घडने पन्ने-पखावट पा पिवाज पही पा
अब भेटा भुना-भाना भायी भनावट भारा भा
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भरपूर नजरो मे म()हर मिलाया
करमो का अदर कडपूर किलाया
गाठ गिल्गीले दु()बारा एक भुलाया
गाठ गे गु()डे टूटा टेक टिल टरमाया
शीशा शा शेक पाठो पे पूरा पुपाया
ज़ुबान जय जाया जिन जे जिकराया
ਬਾਬੇ ਦੇ ਦਰ ਤੇ
ਬਾਬਾ ਜੀ ਬਰ-ਸਾਦ
ਮਾ ਦੇ ਦਰ ਦੇ
ਮਾ ਜੀ ਮਰ()ਵਾਦ
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