दर दाज

जितनी खुली ज़ुबान उतनी जूठी जस जात जहाज जहान
जा खू()ली रात री रात

बाहर दिखावे दी दडपूर दिज्जत
और अदर विस()की क्यो कही कि-काली कि-जत