सृष्टि गोदी के नंदन
आऔ हमारी सांसो से समधन
वस्सु राज्जे वंदं
श्री कल्कि जी के
बिंदु बंधन
सृष्टि गोदी के नंदन
आऔ हमारी सांसो से समधन
वस्सु राज्जे वंदं
श्री कल्कि जी के
बिंदु बंधन
जितनी ज्यादा पेट से भरपूर हवा
निकलती रक्ति
उतना ही गर्मी-ठण्डी का अनुमान
सांसे समा शक्ति
शरीर की मैल के घर के अदर
दुयीया के समाज का पालन-पोषन
_ol s_ow off/on रोषन
समाज के पैर दामाद अदर लेके
सास के साथ उडायेगा
तो क्या होगा
con_tip@ed(i-tion)
ਸਾਰਾ ਚੌਨਾ ਆ ਗਯਾ ਏ ਕਠਾ ਹੋ ਕੇ
ਕਬਰ ਨੇ ਵੀ ਅੱਧਾ ਜਨਮ ਨੂੰ ਕਰ ਦੇਨਾ
ਦਫ਼ਾ ਦੋ
ਜਾਯੋ ਤੇ ਘਾਟਾ ਘਟਾ ਕੇ
ਜਮਾ ਜੜੋ ਜਮਾਜ
ਦੁਰ ਡਿਟੇ ਡਰ ਮੂਹ
ਸਤਿਯਾ ਸਾਸ ਮਿਟੇ ਮਾਸ
नर(का)नर is wit_out _ex
0 th@ _it is _ol _or_d
in(नर)c()s
0 un_1 ()c()urs
a cu_se
—
qu(sc)en 0s out bar_ain
b_ing in()id fu_l_ess _argain
in out ho_ _out t_ain la_e
ju_t si_ in wi_h-out wa_
—
0_ing out _ur_ives pea_
eve-rit_ing in()id is 0 f_eak
u soo_ al1 c_ar-if-y
tal_ en_er 2 can_ary _ie
un_er _round
i-ron @_ract _ag_net
on _ur_ace
ir-on @_ached
भरपूर _ut groun_
mag(y)ne(po)tism
बिजली के भडके
झाड झुड झुड झडके
सास से सारे सटके
कहा से आये करो-ध कटके
—
जब त्यार परसाद है भरपूर हथियार
तो दामाद मे कैसे कैसे क्या
बतियाते बीमा-यार
—
ओखली मे सास तो मूस्लो के
झटके जहाज क्या लेने
देंगे साँस
_i’m_act of soc_ial med_a
is sa_e for ys-lf
thou_h ()_elf in()id
is in da_ger of
भरपूर de_
अलख निरंजण
सृष्टि गोदी का अन्न-जण निराकार
भिक्षां देहि भिक्षां देहि भिक्षां देहि
हे अन्नपूर्णा देवी
आधे को गोदी नंदन के लिए
गोदी उद्धार आदान कीजिए
_ol ton_ue talking
_ol soc()iety stalking
_ol tram_led wor_d
in()id walking
0 fal(off)ing in()id
_ol ha(ha)_ing
गट की शाति
दामाद को नही जानती
बुलायो कितनी इधर उधर मानती
कोयी फायदा नही करक्रूर क्राति
bib_ji waiting
tum() hen m@ing
pu_ri 0 @ing
pap_ji re_ating
_ac_ers _ar _ut se_ating
_oom to_ h@ing
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