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भरपूर आधा ने ख़ाली आधे की
_arn@ion पे भरपूर _cra(pi)tch मरे
हाथा(4)पायी सास सिलायो

अदर की कमी को भरपूर समाज के
जोर जय जाडते जिधर जा
भरपूर समाज से सिला सिखाया
पीला पढाया
आज सास साडी सर सरूप सदी
अगर- बाटी के धूये धे जाग-रूक जडी
आधे एह क्या किया
जू जाल जाडनी थी
बाल बिकाल बया
कही किरा क्या
नजर नही नहाये
भरपूर कल के मा-बाप
और सोच रोले आज ले आप
किसने कल करपूर काया काप
क्या लाया आज का तरपूर ताप
जिन मा-बाप ने कल के समाज सा खरपूर खाया
वोह क्या आज के समाज से सरपूर तप तपाया
तुला ताल तिल तगमगाया
१० का क्या किलता के
जिसे भरपूर बहस का भास
आधा जन्म की एक गाठ गाये
गया गास गेरने दामाद दा
रो-गुना राड-पूर रास
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