आधा अदर नरपूर निरबल
आधा बाहर दरपूर दुर(मूह)बल
और बीच मे इधर उधर दरपूर ()थल
जन जन दामाद उज्ज(भरपूर)बल
Author: mandalalit
in(नर)c-red-iबल
यह क्या च()डी बनियान की दूयीया _ut से बाहर निकाल राखी है कि()की
इसे देख के कौन-कौन से दन्त म()जन अच्छे बुरे भलेगे
ys-lf 1 a_ult
घर के अदर _each fu_l wa_er नही है
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मन डालो लिट
स()य तुरंत
एक अंत एकांत का संत
क्यो कही कान कहे
गाठो की ज()जीर
एक-एक पूरी लकीर
क्या आये क्या जाये
अदर बाहर फ़कीर
रात रौदे दिन रूले
तक़रीर ती तकदीर
y s_or
@ in(नर)4ma_s_un oवर_o_d
y-0-s in()id u _ol s_um_el abo_
fi_l in _app-li(va)cas_un so_red
in(नर) com()p_@_ 0 _oor _lo_red
n 0 or 1
_either 0_ing le_t _or ever_t_ing _it
1 _y_ fo_d 0 un_old de_p(_ar)th_ bi_
गत्ते घाव घर
बाहर ढूढे सुरक्षित छाव छी छत
अदर आधा जन्म जी भरपूर मु()सीबत
इधर उधर बेकार बिखरे बकर बत
ऊपर निचे बैठा एक-एक गत

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