तुम-हारी उगलिया उगे टकली
खल्शियम खाया खाट खकली
चेहरे ची चाल चटपट चकली
चखा चाहता चकमकी चमली
Author: mandalalit
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सु-नाम सग्या
जो आज्ञा भरपूर भय भाग्य
विधाता वायापुर राम राग्य
बनवास बाहर बाया बैराग्य
सासे सुदर सरनाम -योग्य
जो मै घर के अदर हू हो वोह क्या तुम बाहर तरू तूतू
समाज से सीख के आये घर के अदर भरपूर राय रू()रू
जब घरो-घरो मे अतर करते
तो घर के अदर ज()तर जय जानते
ब्रह्माण्ड के देवता
सृष्टि मईया की गोदी से छीन कर
असुरो को भरपूर भरते भा
घर के अदर भरपूर अज्ञानी
और बाहर भरपूर घर आ ज्ञानी
खे-खे-खे
एक मूह बारह आखे
रह रह बजाये बुरा बाखे
काया करे तेरा सलाखे
मेरा जवाख अदर चाखे
बाहर डाले गले दाखे
आधा जन्म सुधरा सरबार
के-शव के अनु-सार
शव है अदर सास के
अनु का भरपूर विस्तार
तत-तरु
तुम हारा तो सब कुछ तू-तू से शुरू होता
और हारा से अत आयी आता
फस गया आत()डी मे माता
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अरे यह क्या सास मरा हुया अदर नही
मारा हुया १/२ बाहर बाटे
निरंतर जंतर
ख़ाली सांसो के अंदर सम्पूर्ण शांति
जिसके ऊपर-निचे आमने-सामने इधर-उधर अंदर-बाहर
नहीं खड़ी हो सकती बटी हुई आधा जन्म की एक शक्ति
m(a-i)c-ro healing
ऊपर का नीचे का
विनाशकाले विपरीतबुद्धिः
जिस ध्यान से घर के अंदर mic-ro gut की
पाचनशक्ति की विपत्तियों को दूर किया जाता है
उसी तरह सृष्टि गोदी की शक्ति अंदर m-ac_ro gut
के ध्यान से विपरीत बुद्धि को नष्ट करती है
सबसे पहले अपने अंदर के ध्यान को ख़ाली करे
ताकि ध्यान को पता हो धार किसे काट रही है
चोट तो लगेगी ही काटने से
उस चोट का क्या फायदा जो
अदर सास को बाट के बाहर बटे
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