नरपूर नाम को तेज भगाते
शरीर की मैल सास मे समाते
भरपूर भाव भरपूर साव साते
भर गये अदर दरपूर दाते
नरपूर नाम को तेज भगाते
शरीर की मैल सास मे समाते
भरपूर भाव भरपूर साव साते
भर गये अदर दरपूर दाते
तेरी हसरत न होगी पूरी
बीच मे अदर है दगी दूरी
जो मिला मै फितरत तूरी
ले आया माफिला मजबूरी
नडायो नडा नरपूर नदर नूरी
आज की पडपूर पुस्तक
कल की दरपूर दस्तक
अदर न मिली फ़ुरसत
भिन भिनाये अदर बाहर
भिक्षुक की रद रुक्सत
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खुद के अदर मारने के लिये शूद्र
बिंदु के लिए ब्राहमन न बना मुग्ध
बचे जो काटे क्षत्रिय जडपूर जाटे
न जताये प्यार वैश्य मरा मार माटे
गुरूजी का आशी()वाद
सुनाये नही
अदर मा का अनु(अंतिम)वाद
8 के है धडपूर धनि
9 तक नही आन बनी
कहा से आयी मै मनी
तू तो है आधा कनी
स्थिरता में सास से नही लड़ोगे तो स्थिर साँस तो जीवित भी नही भरेगी
वेहली है दुनिया अदर दुयी निया
खाली वेला तो है गोदी की रात की बूँदिआ
शरीर की मैल रहे घर के अदर तूतू मै मै की छैल
आत्मा नही रहती खाली कब्र की फरजी फैल
प्यार पे पिक्ला पाके पैला
मजनू का न मिला थैला
अदर नही मरा मरपूर मैला
बाहर छबीला उछला छैला
घर के अदर तो मरे हुये शरीर को रखते है
बाहर तो आत्मा को भी कोई नहीं मार मुक्ता
सास तो अपने निर्धारित नमय ने नई नाल नही
इसका अनुमान कोई भी नही लगा सकता
अदर-बाहर
अब अपने नरपूर नाम नदलो
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