चैन की ख़ाली साँस (सब को दिखावा लगती)
लेना कितना मुश्किल है भरपूर घर के अदर
(तुम) सोचते हो की (मेरा-मै) तो अकेला हू (मुझे) नही फरक पडता
(मेरे) पास सब कुछ है इस समा(दा)ज से दूर रहने के लिये
घर बगला गाडी (बीमारियो से कमाया) पैसा
यह तो अच्छी बात है
समा(दा)ज की तूतू मै मै क्या
घर के बाहर पैदा होता है
यह अकेला कौन है
दज्जिया दाज दिकलाये दडी दात

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