कहती ज़ुबानी

भरपूर ज़ुबानी बान न मानी

मान मान के थक गयी कहती ज़ुबानी

i m ti()ed

(कितने भांड रखे है लाल

()च्चो के ()च्छों में)

चलो थक कर बेहसोगे तो

दामाद भी ताजा हो जायेगा

पर यह क्या सास तो झुकी पड़ी है

झुकने को भी सस्ती घडी है

न भर भरपूर भद्दी भाड़ी भय भुड़ही है