a_er()t
Author: mandalalit
आ-स
तुछ मानस
मान सास फिर उपवास
तेरा दिखावा भरपूर वास
मा को लेके नस/नस का दास
गोदी के बाहर भरपूर जायेगा बिना त्रास
शुभ-न्याय
कलयुग के या()त्रियों को
आधा जन्म के भरपूर दिन-रात
अंदर बीमा(या)रियो की
शुभ-काम-न-आये()
भैभीत
भू-का प्यासा आधे कितना भरपूर भैभीत है तूतू में में की दुनिया की तूतू से
gut गोदी के ख़ाली शेर से कहो पूरा li-on
g or t -ui
y in()id u do hav 2 *_ress gra-y-ti(mul-ti)tud of y in__tion
in-su_icient use of po_ent- lo-ti-on
un-a-war
आधे बूंदियो के ख़ाली बैठने से कितनी जलन होती है भरपूर वेहले को
हर वक़्त gut सृष्टि को भरपूर नाम-आम (b_am )
आधे तो जैसे तो गोदी का भरपूर विनाश-व्या-कारन हो गया
न-कली
बचो यह है दांतो की बनावट
दांतो की चमक नकली है
मेटर जी
लू-भाया
कहते है रोगी को बैठना नहीं आता
भिड़ता रोग भगाना भय भाता
इधर उधर एक नहीं इत-राता
इतना भी नहीं ध्याता
बैठा रोग भीतर मु-खोटे लुभाता
रख-वाली
तुम्हारा भगवन मूर्ति के अंदर ख़ाली है
gut मईया आधे की आँखों के अंदर ख़ाली रखने वाली रखवाली है
भूखी नींद
भरपूर के रहते कलयुग के भगवन को तो gut मईया मिलने से रही
,जा फिर बाहर कर दी गयी ,
इसीलिए भूखी नींद ही सो रहा है

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