वोह समय काल के अंदर जीवित है
और यह समय आज के अंदर से गुजर रहा है
वोह समय काल के अंदर जीवित है
और यह समय आज के अंदर से गुजर रहा है
y liv gen()ra-tion to _ow y in()id u co_u_n bec()me con-son_ant t()u
कल के बचे तूतू में में दुनिया के मा-बाप तो कुछ कर नहीं सके
gut गोदी के लिए
इसका बल-मत आज के बचे gu_ess _ain तो दोगुना भरपूर भर भरेगे न
is gut nature
an in()id _orc ur_ing
y in()id u is
f()iction of _act
fo_cing
y _or
a hu_an _if is ble_ing of _od _est_ow y in()id
u within surface breathing is s()all_ow s_ing
तूतू में में की बोली तुम्हारे भगवन का प्रसवाद है जो चुप-चाप हजम-बोला
अदर है एक मोल का रोला के अदर e-no
घोला और फिर बोला तूतू धुला धोला
दिन में सोते भरपूर असुरो की रात की भरपूर वाता का जगाता का जगराता दिन ही हुया
अधेरे से आखे लदाते है अदर के दिन-रात की
तो फिर रात कब हया
an emptee _ime un()not
rh_me wiw o aump()tea
_rime unnot div-is_ble
in()id u _ime
_h@ _ill adha do
wit()out
adhe breathing
d-i-d wit()in
emptee()ead adha
a()lon
t_ain _ot
_itt_e in()id
_ate
घर की नज़र के बाहर तो भरपूर
मि()ची टाग राखी है
कान के छेद में क्यों नहीं डालते
आंखे तो बचाया ही लायेगी
कानो के छेद के अंदर
भरपूर भय के लिये
भरपूर ईंट का जवा(न)ब
म-रद ही देगा इम्तिहान
दौड़े इधर उधर भरपूर मचान
किसका आया है फरमान
मौत न देखे सर का भरपूर सामान
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