sim(pal)ba
Author: mandalalit
आयना देखे
जितने मू उतनी जू-बाते
काग काया कालक न ख़ाली राते
चा()दनी की भरपूर बरसाते
आयना न देखे मुखोटे भरपूर सजते
भूले भले न ख़ाली रहते अंदर रखते
शरी आप
भरपूर शरी आप न मिटा सके बूंदियो का श्राप
नही बदला भरपूर बदला लेने का पूरा पाप
आप आप आप लगे रहो भरपूर बाप
भाप न जाने अंदर का भरपूर माप
_unt
is y gen_(er)le-man se_sit-ive on to
_on gut surface()all f()ont co_si_er-ing
in()id un()not s_it to pass _all b_unt
देस
भूल जायो आधे देस
ऐसा बदला नही वेश
क्यू ढूढे भरपूर सन-देश
गोदी को करे कैद भरपूर भेस
le _ing
an e_r-li _orn-ing _alk is
_les-sing for _ol
_ae
h___
y un()not u _ear
g(ut)odi’
si_ence
कितने कख
गोदी की ज़मीन की खाक छनेगा
एक()नेक सास अपने अदर के भरपूर कख से
कितने कख है भरपूर के दामाद के अदर
hang_ed _an
आधे की बंद आँखों की नुमाईश की है फरमाईश भरपूर चाहे एक ख्वाईश
असुरो को ख़ाली बिठा के अब बांधे है गोदी मे समाने की गुंजाईश
अब क्या वा()धे के आधे से शा(त-ब)दी करोगे
फिर उलटी टांगे डालेगी भगड़ा गोदी के आसमान मे
hang_ed _an
ख़ाली आस
दुनिया की एक सास का वास
नही शामिल गोदी के अंदर का उपवास
ख़ाली हो गोदी का सारा निकास
आधे की एही प्यारी प्यास
कब खुले बूंदियो की ख़ाली आस

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