गोदी मईया रा १ आया है
आधे ईतय से आदि आरणि आ
0 mae _is em()tee f()og
गोदी मईया रा १ आया है
आधे ईतय से आदि आरणि आ
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gut ब्रह्माण्ड की शुन्य देवियाँ क्या भगवन की माँ नहीं होती जो ख़ाली() माँ को वर-दान भरती
शुन्य देवियों को पूजते नहीं सांसो में समाते सा बिना समाय
तो यह भगवन तक पहुँच ही नहीं सकते
सारी दुयाये अंदर भरपूर भार
भरपूर सास के घर का अनपढ़ नही पड सकता ख़ाली अन्न का धड़-धड़
तुम-हा-रा सास की भरपूर भक्ति का एक निवाला
अदर नही लाया भू-ताला
निवा रह गया मोह-भाया का जाला
इधर उधर बिछाये उचा भरपूर भाला
तूतू मे मे की एक दुनिया के समाज के कधे तो काम-जोर भरपूर है
तो अदर भी तो टके-टके बधे सासो के भरपूर चोर सवा-सूर है
बाहर का sim_ard भरपूर अदर भरथा
और अदर का sim-sim dis_ard
नहीं सोता
गोदी के अंदर मर-दान()गी झाड़ते है
और गोदी में छोड़ के वापस आते है क्या
शरीरो के जले हुये ()रद की भरपूर राख
अदर के कम-रो के क()मो को भोगने आये हो
अदर के बाहर
तो की सृष्टि गोदी के अंदर को रोगो गे
सास की अपवित्रता से असुर
तुम(अदर)हारी की भरपूर कर-तू-तो मे का प-रदा
भरपूर मा-बाप से छिप सकता है
गोदी की ख़ाली आहों से नहीं
_h@ is or-i_inal _orm of _abi?
तुम कल भी बे-गाने थे
तुम आज भी भ-गाने भले हो
तुम कल भी बह(ी-खा)ने हो
अपवित्र असुर घर के अदर दिखावे के लिये
कमी-ने एक-एक के लिये भरपूर स(द)ड़के है
तुमने आधा जन्म को दुनिया के अदर-बाहर एक-बना दिखाया
दुनिया का अदर साया भरपूर सर-माया पूरा चढ़ाया
चाहे रुखसत हो जुबान की मैली नक़ल
या खफा जाने दो भरपूर की शकल
कल आयने मे आज रुकता रहा
आज भी दुनिया के -माने मे भरपूर बिकता बहा
अग-अग_razi करना कहा सिखाया
wa_c_ing on wor_d’ coo coo y-0-s in()id u
बेडा पर एक गया _ar आया
दुनिया के इक दिन की इक धुप-छुप तड़ी बेज तो तही ता
भरपूर को ग()मी को s_er_ize सारती सा
अब _as_t_oph तो gut के अदर ही आयेगा न और
बहार सोना चम-चक-मकायेगा
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