जानी जो भरपूर डूबे उसे क्या कहते भरपूर भ-यानी
गोदी में द()बो दो दि()खो ख़ा()ली का()ना की का()नि
यकीन याया ()यानि
जानी जो भरपूर डूबे उसे क्या कहते भरपूर भ-यानी
गोदी में द()बो दो दि()खो ख़ा()ली का()ना की का()नि
यकीन याया ()यानि
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आप ने एक एक लेन की अदर देदी देरी
और अब आप भायेगे भरपूर भेदी भेरा-फेरी
भरपूर भावना अज्ञात आती आ भरपूर उज्वल उठती आ
और शरीर का एक एक सताया आखो आगे अखती आ
काली सास के भरपूर दामाद की भरपूर श-रते शो()धित क्षति क्षा
सफ़ेद बाल आशाढ़ का ख्याली ख़ाली पाल
ख़ाली काल्कि के विचार है कहा दर्ज गोदी के ख़ाली धर्म उपचार फर्ज
आधे पुराण (हरि)आळी आर आधा प्राण पूरे पार
गोदी के पा(दा)ना का कि(हि)साब तुम-हारी दुनिया दिखाती दया
है ही क्या गोदी के अंदर तुम-हारी दुनिया की दी-वानी
सास के भरपूर दामाद की भरपूर एक-एक निशानी
गोदी की उछाले भरपूर फैलाये अपने अदर परेशानी
जेब के अदर भरपूर बीमा(या)रिया दुनिया के एक-एक को भरपूर प्यारिया
किसी को नही है ख़ाली तुमसे उम्मीद बाहरिया की नीद मे भरपूर भुम भाचो भिखारिया
भरपूर को भरपूर से मिलने के बाद वक़्त भरपूर जाया बर-बाश्त बाही बोटा
रिश्ते दुनिया को अपनी बाहर की मर()जी से क्या मोड़ते
भरपूर भोड़ना भी भुना भाना भोड़ते
भगवन का भरपूर आ-शीश-वाद है
सास के ददमाद अदर सबको एक-एक भरपूर याद है
कि नही तुम-हारी मर-जी
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अब आधे
आज की सास सो स्या ()हेगा
सास के चनदर चो चाथ ची चलती चा
पर हाँ g(ut)round तो गोदी की जिम्मेजारी जा
बीमा(या)रिया जो जारी जाम जनता -ती-जाती जा
पलायन अदर भरना सीख सो सती सटटा सा
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सास भरपूर तूतू मे मे भेहमी
मेरा अदर अध()मी है साफ़ आधा
तो मे छीनू एक-एक का भरपूर
दुनिया(तू)दाता बाधा
फिरगी तो है भरपूर बगी
इधर ऊपर से भरपूर इधर कघी
निचे से नचाले ऊपर भरपूर जगी
सास दुनिया दी अदर-बाहर भरपूर डगी
ne_er _ind _ever _ind भरपूर b_ind
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