a c_ean pro-teen is ne_ther _hey _or p_ant r@_er _ol y-0-s in()id u ever-y1 _p_een
Author: mandalalit
ici-al
is _here in()id _ea()th an intel(di)ligence rei_n an art-if-ici-al
0 _y a chan_e
ever-y1 in()id u _ar y-0-s off-ici-al
s-0-y _ad-i()ca_l
आ-हा
हम(आ)रा आधे गोदी का सुर रखवाली ख़ाली माली खिलेगा
तुम-हारा आधा अपवित्र असुर भरपूर सास के अदर भिड़ेगा
गोदी के दिन रात का अपमान करने की तुम्हे कोई सजा नहीं मिलती
for y-0-s in()id u _ome _et u beli()v a ha_f
on mis_ach is ever-y1′ ri_ _ach
_ol 1 cha()it-y in()id 0 _ach
सा-आ
बनावट की सास से ज़िन्दगी की दगियो की सजावट अदर ही भरपूर सजा की वाट एक एक आख़ेजी
और सास भी आधा जन्म डटी डालेगी दूसरो के एक-एक के लिये लाखो ली
मेरा अपना एक कहा का
बाहर का सपना सेक सलाह सा
भाली खट खर-वट खा
पूरी दुनिया सास के भरपूर दामाद के अदर एक-एक आराम से बैठी है
और यह भरोसा y-0-s in()id u-की के ऊपर पूरा है
पिछले क()मो का भूल भाते भय अदर
और आज के काम अदर आवारा भरपूर ख़ुशी आते सास के मन-दर
ख़ाली ललकी
आधे की पालकी
लय गौ()का लालकी
e*/_ir_or
y-0-s | s-0-y
eas_ly di_ested
0 s_ot_y 0
आल -लाल
गोदी के गाल gut ब्रह्माण्ड के बाल
कब कटे कंधार के कु-रख़त काल
योग भरपूर माया ख़ाली खाखन खाल माल
जगराते जब जगे अंदर जागो जय जया जलाल
मुहूर्त ख़ाली
ख़ाली मुहूर्त हेख खे खलियुग खा दिन दायां
आधे ख़ाली गिन गिन अंदर बाँवरी बायां
रात भरपूर रू-गले दिनरैन ख़ाली दिलाया
आधे ही अड़ा ते अड़ाया ख़ाली खाया
बूह बाते बक
मितने मूह मिटने माते
खितने खूह खिटने खाते
लितने लय लिटने लाते
तुम तो हमेश ही रहोगे गोदी के नत-मस्तक
तो क्या घर के भरपूर अदर एक-एक डरोगे
गोदी के इंसान की ख़ाली दस्तक
सोते जागते y-0-s in()id u के मरोड़ घर के अदर भरपूर हथोड़े दौड़
कायदा खुपड़े
आधे ख़ाली खमय खान खक खी खहि
खितने खरे खतरे खुपड़े
भरपूर भलयुग भय भसुर भपडे
बस-बस अब नहीं है भरपूर सास का फायदा
गोदी के अंदर है ख़ाली काली कमय कायदा

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