गोदी तृप्ति तो ख़ाली घर से होती है
क्या तुम्हे भरपूर आखो से अज़र अहि आया
रा के केस भू(ल) गये ख़ाली संदेश
छूटे आदते भरपूर बने अंदर बेश
अदर न शरमाये बिखरे न वेश
भरपूर मे तो नही तत्वा तरेश
गोदी तृप्ति तो ख़ाली घर से होती है
क्या तुम्हे भरपूर आखो से अज़र अहि आया
रा के केस भू(ल) गये ख़ाली संदेश
छूटे आदते भरपूर बने अंदर बेश
अदर न शरमाये बिखरे न वेश
भरपूर मे तो नही तत्वा तरेश
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ख़ाली मटकी शोर मचाती मा
और
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u _oint it _out poin_ it u do-u_t
a y-0-s in()id _or_man _lames u _ools
जब जागो तूतू मे मे की दुनिया का एक लूट(ये)रा अदर ही लूटे रात का अधेरा
सौ सोनार की, एक लोहार की
ख़ाली लोहा सौ सोनारो का एक एक अंदर ही काटेगा
एक सोनार की, सौ लोहार की
दुनिया के अदर एक भरपूर का सोना सौ लोहारो को अदर ही बुझायेगा
बाहर आप कह के बुलाते
पाप अदर नही छूटे भरपूर लाते
एक हाथ से ताली नही तलती ता
हा तो दुनिया की भरपूर श(य्या)पथ एक सास के
साथ से ही ग्रह()न बही बरते बा
भरपूर त(ल)त्रा भरपूर गाड़ी और ख़ाली मंत्रा अदर अनाड़ी
अपवित्र असुर एक काम भरपूर बखूबी आखो से भरते है
भरपूर या ख़ाली हर इज़्ज़त उतारना
घर का कैदी अदर लका लाये
कला भरपूर भरी दुनिया अदर भाये
सास क्या जाने अदर-रक के रुके का स्वा()द
कल न पछताये आज पुछाये क्या हुया जब ठोड़ी ठग गयी अदर ठेठ ठाय
लाठी भाई अदर बाटी
तो इद्री हठ अदर भरपूर आती
भरपूर तल के ९०० ताल खुजलाये अदर एक बल बाये
t_ere’ _ife _ere’ on wor_d
wit_out wit_in _ap of na_ure
y-0-s in()id u w_or-l t()irl
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी
सृष्टि गोदी की जननी का पूर्ण ज्ञान साँस का ख़ाली स्वर्ग (स्वर का गर्ग) संपूर्ण वर्ग
फिक्र को धुये मे उड़ा दिया
सबक भी न पड़ा भरपूर भहा भया
अदर ही ढूढे भरपूर जि-कर का जिया
फीका फडा फाड फे फुरा
आखे हाय खड़े खो क्या करोगे पिया
दुनिया मे तक()रीरो के घर लू(लु)टते लुटाते ला
बाहर तो कालरात्रि के चरचे चाली च
बाहर ही गिरे तारे अंदर तो बूंदियो के ख़ाली खारे
गोदी में उतरे खैर के खूब ख़ाली न्यारे
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