_it _icking

0 in _er_ice


0 _ut dam_er on y-0-s in()id u _ood


0 _ife re()urns a_t-er _all


_eep tu()n-ing on _ife un0 _u()vive wit()out wi-fi

y u()g out to e*/i-ence wi_hout in()id _urge _out


u un0 t_ink & li_10 @ same _ime
i.e. _ow y-0-s e@ing in()id u _ime

for in()id u ne_er a_one
& out()id _lone y-0-s _eeking c_one

a _ol y-0-s in()id u _an e@ out
wit_out _oing in()id _out

a weil_age _an i_enti_y y-0-s in()id u _oot c_use of min_full_ess pat_er-n _ie

an ever-y1 p()oblem _as a _olution is _ol pro_lem

a _ol is g()eater than _um of ha_f _arts

y-0-s in()id u _ar 0 on w()ong end of on
& u _ar ri_ in()id out()un

मा-फा

अपवित्रता को मापा जा सकता है
क्यों नहीं
a ha_f कलयुग is _ol me_sur of _alf सास on कलयुग जुग जुग


an i-नर-tia in()id en-er(_un)gi can0 be de_t()oyed
तो फिर लाठिया मरने से अदर क्या टूटेगा


सास की भरपूर जात का क्या नाम है दुनिया मे एक-एक के अदर
dis()man-tle in()car_ation b_un_er


fool को ish से @_ac_करने वाली y-0-s in()id u तो भ()वन से भी बड़ी _ish फा

ह(र)जार

काल्कि का अंदर ख़ाली अवतार


gut मे प्रलय की लय का उप-चार


पुराणों मे न दिखा लिखावट का ख़ाली नार


सांसे ख़ाली अंदर अनंत आर-पर


ख़ाली घर अखंड भीतर आधार


ख़ाली टेक धरो दिव्यां-ज्योति के ह(र)जार

एक मियानी

जब आधे-आधा सास के अदर होके

एक नही रह सकते

तो पेरो की मियानी में दो मरद कैसे

कल कल करते का

सीधे सीधे बतियाओ

एक घर के अदर दो ()रद रो रुकते रा

येसा थोड़ी दिखता दा

शुद्ध शादी फेरो की फूटी फ

दुनिया की एक बर्बादी मोल मली मय

क्यो नही पल सकते पाछे पभी

बनेगे तो भरपूर भक्के बही

हम दो हमारे दो सच्चे सती

छी छोर सवा


ि छदा छोर छत-वाले छांटे
ख़ाली खोर खाट खाटे
दारू दौर दनदर दते
हिस्की हट हरपूर हटे हाँटे


कितने सवाल सास के सवा लाल
अदर ही भरपूर एक बाल
तो क्या _urg करने भी एक आधा साल
किसे बताते अदर भरपूर भाल

_uch -कल

सुद्ध-बुद्ध का जला एक-लौता भरपूर पिला

y-0-s in()id u भरपूर बुद्धि भी झल्ला कर झोकती झा

अदर y-0-s in()id u की जान है (बचा) तो नेक (नचा) जहान एक महान (मचा) मे

ख़ाली खंडे

आधे ख़ाली शैईया उठाने के कंधे नहीं है दुनिया के नेक बन्दे
बूंदिया ही लाए ख़ाली खंधे ख़ाली हो रुख्सत रहे राद द्रोण दे दंदे

ख़ाली रखने से गोदी गोत ख़ाली गति गा

माड़े क()मो को खरीदी बीमायारीयो की भरपूर कमायी दाता कोई सास अदर

जैसी अदर मोड़नी वैसी बाहर निचोड़नी
कहा है बिगड़ी होई भरपूर तोड़नी

-या -र

बिना गीले गी श्राप गिया
फिर तो पाप ही आप पिया
धुया धरदर धाप लिया
रत-रा रोये रात रिया
धत धोये ध-धात धिया


भरपूर सोचने से सास की सात सगी अदर जागी जात जा


मकरे की बा तो मनायेगी की मेर
तलो की भरपूर त्रास तले ताली तेर