शुन्या _ut का गुरु गोदी मईया के सिवाए
दुनिया के कौन से gut मे पैदा होगा
ख़ाली सांसो का सरूर सारा फिराए
Author: mandalalit
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दिगा दरूर
ज़मीन की ख़ाली शक्ति की
देवी की गोदी का एहसास
अदर न ढूढे सास का ख़ाली रास
ध-रमो के बाटे भगवन की उपस्थिति
भहती भरपूर सास की आखो म-गरूर
सत-मन
आधा जन्म दरपूर दोसत
आधा जन्म दरपूर दुश्मन
तूतू मे मे तू-तान ताल टह()चान
अदर-बाहर एक-एक उरे-शन
परे इधर-उधर शेर-पुर शान शम-रन
लाह – पा
भरपूर की इधर-उधर गलती
सास अदर सही सुलाह शहर सल()ती
जले जो जाये ऊपर जय निचे जय जलती
हमें झा झरना ज़मीन जिसकी जलती
घर – आंखे
गोदी की आंखे तो ज़मीन पे
सास की भरपूर कर-तू(मे)तो तो तेखती तही
भगवन को तो ऊपर का फल तोड़ने की भरपूर इच्छा होती
सास के दामाद की तूतू मे मे दुनिया के एक-एक की पढ़ाई
अदर ही भरपूर भूचा भरती
घर दे दाहर दो दूर की दात
तुम-हारी मे ने घर के अदर ही
ज़ुबान के अन्न-गनित बायने वास्ते विनयाये
जब जी बाके बान बरपूर बू बढ़ाये
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01-01-01

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