t_ere’ _ife _ere’ on wor_d
wit_out wit_in _ap of na_ure
y-0-s in()id u w_or-l t()irl
t_ere’ _ife _ere’ on wor_d
wit_out wit_in _ap of na_ure
y-0-s in()id u w_or-l t()irl
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी
सृष्टि गोदी की जननी का पूर्ण ज्ञान साँस का ख़ाली स्वर्ग (स्वर का गर्ग) संपूर्ण वर्ग
फिक्र को धुये मे उड़ा दिया
सबक भी न पड़ा भरपूर भहा भया
अदर ही ढूढे भरपूर जि-कर का जिया
फीका फडा फाड फे फुरा
आखे हाय खड़े खो क्या करोगे पिया
दुनिया मे तक()रीरो के घर लू(लु)टते लुटाते ला
बाहर तो कालरात्रि के चरचे चाली च
बाहर ही गिरे तारे अंदर तो बूंदियो के ख़ाली खारे
गोदी में उतरे खैर के खूब ख़ाली न्यारे
असुर भरपूर ताकत वाले वोट वा
अपनी अपवित्र आदतो से गोदी मे ही भरपूर तखत भरपूर भखते भा
देवो की अखंड मासुमियत सृष्टि गोदी में ख़ाली माँ
की सिफ़त के सदके सारा सार ख़ाली पवित्र पा
ਚਲੋ ਅੱਧਾ ਜਮਨ ਦਾ ਕੰਮ ਤੇ ਲੰਮਾ ਲੀ ਲੇਹ ਲਾਯਾ
ਫੇਰ ਰਾਖ ਰੌਨ ਰੇ ਕਿੰਨੇ ਜਨਮ ਆ
ਖਾਲੀ ਅੱਗ ਨਹੀਂ ਆਨੀ ਅਦਰ
ਵਰੇ ਵਬਦੇ ਵਾਰੋ ਵਰ ਚੁਕ ਚਦਰ
अब क्या आधे की ख़ाली मा(न)सियत पे दिए ढ़ालने ढाए ढा
अ()ख़ना दिया ख़ाली है कि दूर मख्मूर
पर है कहा ख़ाली ि()यत नूर
आधे को सा(आ)मने आने की जरूरत तो ख़ाली खा अंदर
आधे न तो आगे न पीछे
न ऊपर न निचे
न इधर न उधर
धार ख़ाली भीतर ही भू-लाया
शुभ-लाभ ख़ाली गोदी सींचे सुर
for u _in’t e*/i()ence no()thing
_et to com in()id o_hing
wit_in _ap of nat-ur to()tal s_ing
tran__end in(out)id em()tee _ing
a _hed_ing s_in or gut _urface()all _pin
_er-ving _ong no_er ever-y1 level _in
a_on u ne_er in(out)id _in
सास के अदर s_an_ard _ar ख़ाली दर्द होते है
so u _av to _ook in()id _other pe()ple’ weillage
for ever-y1-thing to _ing _ig _in
अब लताओं
आप कहते है की आ-दे पाप पे
नहीं नहीं ख़ाली मुखड़े का माप मे
अदर न आये भरपूर जू-लाप जे
You must be logged in to post a comment.