काल्कि आधे बिंदु द्वार दहि दौड़ा दायाँ
आधे बिंदु आमने सारा दिन आज ख़ाली खाया
ख़ाली माँ का रात काला आधा सामने साया
आँखों में खूह खुला खंड खरपूर खमाया
सारथी सा साथ सखाया ख़ाली समाया
काल्कि आधे बिंदु द्वार दहि दौड़ा दायाँ
आधे बिंदु आमने सारा दिन आज ख़ाली खाया
ख़ाली माँ का रात काला आधा सामने साया
आँखों में खूह खुला खंड खरपूर खमाया
सारथी सा साथ सखाया ख़ाली समाया
तुम-हारे अपने अदर आधा जन्म की सास दगी भरपूर भर डकैत डाके
फिर दमाद तो भूले भटके भाटा के ज्वार जाके उचा आखे
ठाठ बाठ पूरे आठ
अदर भिड़े भरपूर जूठे जाठ
भात भात के भिरे नर नाठ
धरो भरपूर धत धत धेरे धुली धाठ
पढ़ाई का बल मत पढ़()आई
और सास का दामाद कहा गया है धरने
i को बाहर खरीदने खैर खाते
भरपूर भक भर अदर भय-लाते
एक-एक ना समझ बाहर बाते
पूरे पैर पड़े ना इधर उधर प()ते
परपूर पढ़ पिगला गला गाते
a भरपूर _ood _ill am_ass-ad_er
_ill pm _ur_ive in()id _tir
_ol nit re_ive _ull _en_ual _ur
@_ain _el_com _not_er _ound _men _ir
y-0 out(re_or)ce u sen_es in()id author-it-y
4 in()div_dual va_i-dat _ae in(_up)er-ior-it-y
_eaving pri_ait – 0 mo-ti_ating in_ide_it-y
mi_d’n’ful space for ful_illing mor()al-it-y
अदर के भरपूर द()र घिन-घिन भाती
भरपूर उछाल गन्दगी बाहर भर-माती
तूतू मे मे दुनिया भर ऊपर से बाहर बढ़ बा-ती
पड़ पड़ परपूर पेट पूजा प-डार पाती
o_ening an em_tee _lack u_b_ella in()id _ill _ring
y-0-s _ad _uck th@ s_a-y-s ne_er _uch
for()ver u in()id _uch
is y lea()ning _as no wit_in tu()ning
_h@ do()s th@ _ook _ik in()id chu()ning
le_arning urning
जब सास के दामाद अदर नही दफा
तो दिखावा का भरपूर मुखौटा बाहर खफा
किसने वेखा ऐसा भरपूर भोटा भफा और सोटा सफा
तूतू मे मे को बहुत चोट चाटती च ख़ाली खोट
चुप रहने से ना भरपूर तूतू के जखमो को मा-रहम मै मिला
इसी लिए अदर की तूतू को ऊचा मे चिल्लाना जरूरी बाहर मै-जिला
भरपूर शोर मचाये रहम बाहर बिकवाये बिला
भरपूर प्यार से भरपूर इत्मिनान मे घर के अदर की शाति को
भग करके गहरे जखम जड़े सास के दामाद के दगो का दारोमदार
तो बाहर कौन सी भरपूर भाति की शाति का उपचार ढूढे
सास के गाठो के कधे न गोदी के चार मीनार
घर के अंदर नहीं ख़ाली इ()वार तो अंदर ही मनायो
माली हालत की मैली-सास मुहूर्त त्यार
(दफ(ना)तरो के काम भी भरपूर भा()ति भे दफ़न दाते द-यार)
सास के दामाद मे भरपूर f_ood_ate कब घुलते घा
जब बीमा(या)रियो का gut बीमा के तलो तो यार-या-यटा
*pyre होता सार-सा-सट्टा साता सा
y-0-s in()id u 0 de_erve pun_shment ju_t u o_serve & y-0 ()solve pun()ment
an adha janam is once begining & n_ver _ending _ol pun-is_ment
with no 1 co_ing out as vi_tor of in()id sa_ior y-0-s a_on_ment
रिसकी राद में दिन रात ख़ाली खोए
वही सांसो के ख़ाली आँसू पिरोए
ख़ाली बंधन बांध भीतर भिगोए
साँस भी तैरे सारे असीस सोए
ख़ाली जोत गोदी की बहार बोए
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