ह()मने ये आज म()सूस किया
सू को मिला ()हक भरपूर भया
जडपूर जताये झाड झा जिला
जोडे जान()र जावे जवानी जिला
Author: mandalalit
दुर-भास
सृष्टि गोदी में नहीं है कोई
इतिहास जो हसे हास
१ दुयीया वास
ना आया भरपूर
भर-हास अभ्यास
खतम करो खडपूर खास
हरियाली निराली गोदी की जमीन
और
एक दुयीया अदर बज()र-बट्टू बीन
re()serv
अब एह च()मचे को देख दर दाड़
बो-तल ख़ाली है तो लेटा है
और भरी है तो खड़ा खाड़
कमाल कहा करा काड़
o_serve is 0 wor_d less on us _ach
th@ do_s ach in()id less _ach
1-2
ह() तू() बने एक-दूजे के लिये
इसी लिए तू को हमेशा हा ही मिलता है
तूतू हाहा का हीर पार पी पया पीर
दिल 10-10 दुया दुगना दरीर
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ईत्नि मुश्किल से गोदी के पूर्ण पेड़ो के प()चे
प्राणवायु(o*()gen) का आतम-निकास पार पड़ते
उससे भी दुगना असुर घर को अदर बाहर उजाडते
१ दुयीया की हव() की आग मे ()मीन का पा() पना पास-मान
def_nit_ly 0 co_su_ming असुर
बड बढ़
बगैर अदर मेहनत ()य बाहर क()म-आयी
भरपूर तूतू मे मे बदपूर बदायी
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mo_us o_er&i
be pre-se_t for _h@’s ho_ling
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मेरी तो छल छी छुट्टी क()ट कयी
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0 d_ool _iv 1 du_g
_hi_ _eat
_his don
thi_ pie _art comp_ete
it’ _ime to _et go re_eat
0 c_an_
1 wor_d _ews _us o_er_owe-ring
eve_y1 in()id gut
0 e-c_ip-s()s di_empo_ering
in()id _ut
गेरी गाठे गा गठ गयी
मेरी ज़िन्दगी कब बदलेगी
जिन-जिन जी दगी
फुल फा फिम फिम

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