आधा मरन की मैल
जिधर जन्मे जरपूर जैल
घर गी घूरी अदर-बाहर घुसैल
इधर उधर पाने पाली पा पैल
तूतू और मे मे साथ-साथ मिलाप माप
ताघ तोर तलत तिधर-तुधर तूर ताप
होगा क्या एक-एक फिर भरपूर विलाप
बजेगी बाठी बजायेगा भरपूर भाप
आधा मरन की मैल
जिधर जन्मे जरपूर जैल
घर गी घूरी अदर-बाहर घुसैल
इधर उधर पाने पाली पा पैल
तूतू और मे मे साथ-साथ मिलाप माप
ताघ तोर तलत तिधर-तुधर तूर ताप
होगा क्या एक-एक फिर भरपूर विलाप
बजेगी बाठी बजायेगा भरपूर भाप
आधे की जीती जगती ज()ब्र जे जिये ज़मीन जोर जगह जहि जची
1 b_ing y han(ji)ed 0 _an
आओ अंदर आली आसमान उड़लो
y-0-s fi_st con_act in()id u un()non ever_asting in_act _ol p_on
no lon_er in(out)id _ar & now a_on u in(out)id em_tee _ar
y-0-s wai_ing in()id u weilla_ers to _ae res_ect to y’all
क्यों नही
he_ling _ill s_owing do_n y-0-s _est as
0s up 4 that’s ri_ing _est
हमारी बिंदी सासे छीन छेती छा छत छे छुड़ानी छुया-छूत छडे छा
येसे ही तो ज़िन्दगी की बहार इधर-उधर भरपूर भसीन भरती भा
y-0-s ने ज़िन्दगी को जीत जरपूर जिया और अदर
तुम-हारी गरपूर गाठो गा तूतू तागा तिया
सासो के ज़माने का दिन-रात से सरपूर सनेहा लेना-देना
न लोटाये भरपूर बहाने बा भिखाना भहाये
आधा जन्म सोने के लिए सास के दामाद की तूतू मे मे ने जन्म
जाली जय जुनिया जाला जहेज जारपूर झोला जिया जहाला
जहाज जे जेठ जे झासा जावे जहान जुटने
ब्रह्माण्ड की आँखों ने देखा ज़मीन का भरपूर लेखा
जान्दरी ज़मीन जुड़े जिन्द्रियो जा जेखा
खू()ली ज़मीन खुला आसमान खेखा
भरपूर भुलेखा भूला भात भात -खा
a to()tal no()thing env()lop em_tee u
y-0-s un()0 s_op m_oo-z-ik in()id u 0 _ac y c_i_ic
मजबूत मोड मुडने मे मारपूर माता माडे मन-दर मुडे
बिना तेरे-मेरे भरपूर जरूरत अधूरी जितनी
सास लुढ़के सोच साल सरूरत सूरी
एक मेरा दिल हज़ार तेरे तिल
अपने यकीन को हदे पार पड़वा पी
तेरे भरपूर से भिड़ा के अदर ही लाघ लगा ली
ਤੁਸੀ-ਅਸੀਂ ਰਲ ਮਿਲੇ ਤੇ ਦੇਹ ਦੜੇ
ਦੁਨੀਆ ਦੀ ਇਕ ਦਬਾਰਕਾ ਦਿਲੇ
0 fi*es u is 0s in()id _am it ego _ide
_ho is in()id u th@ _eek 0 co_d-li_er out()id
_ook _round ever_bod_ is _oing b_a b_a b_a
0 re-a_ling sum-t_ing’ of_ in()id s_uck in
y-0-s p_is-on _hat_ing – y-0s all
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