जुबान के उडते हुये समाज की सकती
कैसे छुयेगी जमीन पे बैठी ताकत तकती
तो ले आयी बाहर भरपूर भक्ति
मिलवाये अदर मुक्ति
सास रूकती
दाग दुखती
जाग झुकती
जुबान के उडते हुये समाज की सकती
कैसे छुयेगी जमीन पे बैठी ताकत तकती
तो ले आयी बाहर भरपूर भक्ति
मिलवाये अदर मुक्ति
सास रूकती
दाग दुखती
जाग झुकती