न डरे न मरे

आधे का दिल मरा हुआ है

इसी लिए ec_ec_ic s_oc

देदे के re()_iv कर रहे है

रात की रू-बर

महीनो से डर नही रहे

भरपूर खाल के खरे नही मानते

दिल शरीर का नहीं

आत्मा के अंदर सोता

ढोते

ख़ाली बैठने के लिए कोने ही सारी
जरूरत भरपूर रोते


घंटे का आधा चुप चुप ना बाधा
तुम-हरा क्या है इरादा
कैसे कुटाया कूदा काडा
किस किस को दिया दया दादा