तुम तो दामाद के घर की चार-दिवाली मे कैद हो
तुम्हे क्या नजर आती बाहर की बट्टिया
बजर-बट्टू नवाब के वैद हो
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तुम तो दामाद के घर की चार-दिवाली मे कैद हो
तुम्हे क्या नजर आती बाहर की बट्टिया
बजर-बट्टू नवाब के वैद हो
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देवी मन की बंद आँखों से सब देखती
इसी लिये गोदी में दिन दहाड़े
खुले-आम चोरी चोरी चाढे
रात कहा रह आयी आडे
तर-सती ताखे स-लाखे
सूखी धरती पे नहीं उगेगा अन्न
दूयीया के एक एक की भरपूर
कोख भी सूखी _a_ch भूख भरेगी
घर के अदर जन न भरपूर बाहर जन
कौन से समाज के मा-बाप को अपने
घर के अदर के बचो से उम्मीदे आती है
हाँ अंदर के बच्चे तो कभी बाहर निकलते ही नहीं
किसकी कैद में ही आधा जन्म जलते
a within aum()tea breath
( सृष्टि मईया की गोदी )
is
to()tal grounded em_tee in(out)id 5-senses
a wiw o presence
जिसकी ()रथी आसमान से उडे
वह क्या ज़मीन के अंदर से गिरे
ढूढते रह आओगे भरपूर सिरसिले
कौन से आधा जन्म जान जय जले
सजना साज सुदर सालो सिले
ख़ाली सूर्य की गर्मी से पिघला
जिन जिन आँखों ने सांसे ऊ-गला
हमारी धारो ने आस(ख़ाली)मान खि()ला
गोदी के मज़धारो ने ज़मीन ज़िग()ला
an in()id _iving he’ll 0 _ind
_e_ven’ in()id em_tee wil_
_ar o_d out c_y 0 _till
w_at ()do y-0-s in()id u _ant u out to be
goo_ 1 _uck st@ing a_ar th@ 0 2 b
y-0-s in()id u _an *citing pur(_it)_u-it of inनर
cu_i_osity of 1 _an’ lu_urious ci_y
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