धड को हाथ तो क्या आखे भी नही छुहाते
धड को पकड रखा वास के काली काते
और तुमने अदर जकड जखा जाते
दिखावे आते जाते
पालन पोषण
मा की कोख से पैदा हुआ
भरपूर कंस और खाली कस
भरपूर मिला समाज सा शोषन
और खाली खिला गोदी रोशन
गोदी करती पालन पोषण खाली बच्चो का
सास का शाह-शोषन सलता समाज के
अदर भरपूर बचो बा
एह क्या आधे
बिंदी तो दायी में ही छूट गई
रहने दो पिसे पता पला
चार चली खाली
चार दिन मे कमरा काली
चार दिन मे क्या होता है
जो एक रात मे नही होता
रात मे कोई एक कहा होता
सब पता होता
शाति बायी शख्सियत-शाली
मै हू इस कमरे की घर-वाली
भरपूर आधा बाहर रख-वाली
मै ही लाती आधा घर खुस(र)हाली
आधे गोदी में कहां निकला कहां वापस आया
इसका तो घर वालो ने अदर नही भरा किराया
अब ढूढते रहो इधर उधर करपूर कुया फिर आया
पुछ पता पला
आज के समाज को सब पता है
घर के अदर क्या हो रहा है
ले-किन ढूढने से ढाल ढीला
chi_का
किसे क्या
ख़ाली आत्माज्ञान ही ख़ाली गोदी का
खरपूर खौफ
सहता-कहता
जा-दो जड़ो
आधे ख़ाली धर्मो के फल की इच्छा
अंदर आन अड़ो
नर-चोर
चोरी हुया घर के अदर से एक नर
घर लोटा समाज का एक-एक सडसूर स्तर
करमो का कर-मार कूडा कूमार
चांटा चाट
देवी के आधे की गुफा के अंदर
कितना गंद डाल के आते है
आधे अ()बूतर
यह शाति बायी की तौ-बा ने
कभी जमीन को छूया भी नही
फिर क्या कंस के घर के अदर
चाटा साफ करने आती
किसके मूह मे धूस रही ज़ुबान
भडकाती भूल भाया बान
अणु अष्टनमी
वस्सू राजे आधे मईया का ख़ाली खालान स्थर सारदो
मईया हमसे ननु नमी न्योता
ध्यान धरो तुर्य्य अणु-पुत्र
साज़ सज़ी बूँदी
आधे की सृष्टि मईया की गोदी रज्जी
आधे आली निराली नज्जी

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