एक भरपूर अकड़ में चुप बैठा है
एक भक्कड़ की बाढ़ को तरड़ ताड़ कर खड़ा है
अकड़ भाकड बम्बे बो
८० ९० पूरे १००
१०० में लगा आधा
कौन निगल के निकला धागा
इरादा है भरपूर भागा
एक भरपूर अकड़ में चुप बैठा है
एक भक्कड़ की बाढ़ को तरड़ ताड़ कर खड़ा है
अकड़ भाकड बम्बे बो
८० ९० पूरे १००
१०० में लगा आधा
कौन निगल के निकला धागा
इरादा है भरपूर भागा
each 1 of u is
_orn to serve 1 pro-di_y of 1 wor_d
for u un()not un_ers_& code of con_uct (coc) of
ever-y-thing inside y-0-s ga_e
p_anning ever-y1 in()id
a_on u _ill re_ain dor_ant
for y-0-s in()id u are ever-y1′ in()id err
i.e. y-0-s in()id u are going _own
str8 _rain
रात में बिना a_arm के जगराता
और दिन में समय को a_arm के भरपूर भ्राता की वाता
पुराने ज़माने के पिताजी लड़कियों के ज़िद करने पर उन्हें जंगल में छोड़ आते थे
और आज के ज़माने में ससुर जी बहुओं को तूतू में में की दुनिया के एक जगल में
y-0-s की मर्जी के साथ आते जाते है
यह तो हर ज़माने की एक बात ही हुई न
कहते है की ज़माना बदल गया है
तल की सास की वेश भूषा बदल के ज़माने आभूषण हो जाते है
( क्या हुआ
भरपूर दामाद लेके वापस अदर आ गयी )
sa_e old 1 _ear _am old y-0-s in()id u
_hat chan_es भरपूर s_yle
readi for _ut
&
b_ow
d_y-un देदो
सृष्टि गोदी की सफाई के लिए एही उचित रहेगा

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