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एक भरपूर अकड़ में चुप बैठा है


एक भक्कड़ की बाढ़ को तरड़ ताड़ कर खड़ा है


अकड़ भाकड बम्बे बो


८० ९० पूरे १००


१०० में लगा आधा


कौन निगल के निकला धागा

इरादा है भरपूर भागा

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ज़िद्दी

पुराने ज़माने के पिताजी लड़कियों के ज़िद करने पर उन्हें जंगल में छोड़ आते थे


और आज के ज़माने में ससुर जी बहुओं को तूतू में में की दुनिया के एक जगल में

y-0-s की मर्जी के साथ आते जाते है


यह तो हर ज़माने की एक बात ही हुई न


कहते है की ज़माना बदल गया है


तल की सास की वेश भूषा बदल के ज़माने आभूषण हो जाते है

( क्या हुआ
भरपूर दामाद लेके वापस अदर आ गयी )