भगवान एक
और भक्त अन्ने नेक के भरपूर टेक
फिर रखो आखे क्या नीचे फेक
भगवान एक
और भक्त अन्ने नेक के भरपूर टेक
फिर रखो आखे क्या नीचे फेक
बाहर के जग के आड़े भरपूर अदर ला के जुगाड़ को अदर-बाहर जुड़ाते है
जग जग जियो तूतू मे मे की दुनिया के लाल लट्टू लते है
बाहर तूतू मे मे की दुनिया मे आधा चिता बिछा राखी है और
अदर दुनिया की आधा जनता भरपूर खाड़ी है
यह तो घड़ी(किसकी-क्युकि) में छोटा हाथ
और बड़ा हाथ दिखावे की भरपूर झाड़ी है
छोटी सी चाबी से पूरा घर खुल जाता
भरपूर सास कितना (खु-घु)ला भाता है
क्या मे()मानो को अदर बद करके आता
इसी लिये बाहर आखो का भरपूर छाता
तूतू मे मे की दुनिया के धर्म स्थानो के अदर का
भरपूर दिखावे का बाहर आदर
भरपूर घर के अदर का ख़ाली भरपूर आ-दर
ज़िन्दगी की श-रते सुबह को रगीन हो जाती है
दोपहर को सगीन सग आती है
शाम को भरपूर तक़रीर सुनाती है
राते भरपूर भर भर गम घोलती है
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बाहर के जग के आड़े को अदर ला के जुगाड़ को बाहर धोते है
जग जग जियो तूतू मे मे लाल के रटे रोते है
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