भरपूर त(ल)त्रा भरपूर गाड़ी और ख़ाली मंत्रा अदर अनाड़ी
अपवित्र असुर एक काम भरपूर बखूबी आखो से भरते है
भरपूर या ख़ाली हर इज़्ज़त उतारना
भरपूर त(ल)त्रा भरपूर गाड़ी और ख़ाली मंत्रा अदर अनाड़ी
अपवित्र असुर एक काम भरपूर बखूबी आखो से भरते है
भरपूर या ख़ाली हर इज़्ज़त उतारना
घर का कैदी अदर लका लाये
कला भरपूर भरी दुनिया अदर भाये
सास क्या जाने अदर-रक के रुके का स्वा()द
कल न पछताये आज पुछाये क्या हुया जब ठोड़ी ठग गयी अदर ठेठ ठाय
लाठी भाई अदर बाटी
तो इद्री हठ अदर भरपूर आती
भरपूर तल के ९०० ताल खुजलाये अदर एक बल बाये
t_ere’ _ife _ere’ on wor_d
wit_out wit_in _ap of na_ure
y-0-s in()id u w_or-l t()irl
a _hed_ing s_in or gut _urface()all _pin
_er-ving _ong no_er ever-y1 level _in
a_on u ne_er in(out)id _in
सास के अदर s_an_ard _ar ख़ाली दर्द होते है
so u _av to _ook in()id _other pe()ple’ weillage
for ever-y1-thing to _ing _ig _in
जब सास के अदर के काम कम-जोर है
तो बाहर भरपूर काम ढूढती आखे भरपूर मु()ड़ा _or है
o babi baabi baaaaabi
बच्चे क्या शरीर होते है इधर उधर उछाले अदर उछलते आ
भरपूर भछाल भय
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ਡਗਰ ਅੰਦਰ ਹੀ ਡਡੇ ਡਾਇ ਡਾਡੇ ਡਾ
श्री गणेश को विद्या-पढ़ाई का भगवन मानते है
और
सास के अदर विदाई की आई के आड़े नही भरपूर काटे
हठी दाते दिख(आ)वे के दाते दा
दिखावा क्या पड़()दा दा
किराये के घरो मे शरीर क्या खरीदे होते है
तक(दी)रीर कैसे खरीद सकते है जो आधा जन्म की बद()लत है
सास तो शरीर का मर()वीर बेच के भरपूर सोती है ताकि रात की
घुटी बात का बुरा भरपूर दामाद को दिन मे न यहसूस हो
अच्छा अच्छा इसीलिए हाथ जोड़ के
खड़()पूर ही खड़े खाते खा
तुम्हे पहले ही y_ar_ing दे देते है
तुम-हारा भरपूर ह()हारा इधर उधर का
भरपूर बिगाड़ बही बाता
fu_l _oon की जोड़ी जा
एक-ing से बनायी बा
_ull _ur(re)vive o करेगी दुनिया के
एक-एक का ()जा
कमजोर सासे अपने अदर इधर उधर को नही खाक खर खक्ति
तो क्या तूतू मे मे की दुनिया के इक इम्तिहान की खाक नि(वा-ले)खारेगी
अन-गिन()त आधा जन्म के अदर
सास को अदर की इधर उधर की बीमा(या)रियो
ने भरपूर भेर भरा भय-कर
अब उससे ऊपर क्या होगा
ख़ाली कं-कर का अन्न-कर
gut के अदर जल-कर
दामाद तक पही पहुचेगा बल-कर
सुरग मे ही आयेगा उछल-कर
ज़ुबान पे मचला भरपूर चल-कर
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