कर काया

ये ख़ाली या ख़तम खो खेहा
क्यों नहीं शुरू शो शय्या
y-0 le_s _tar_ _tal_ing साया
अनुभव मे गाठ गाया
भाहर भूढो भाव भाया


अमीर असुर आडे आ या अडा आ आहे
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सर बर बफ़न बाध बो
बल मत कफ़न काढ़ता कर
क्यो नही कही कडा कमय कमाया

-गा

बाहर सा सोयी सगा
घर के अदर दरपूर दगा
जात जोग रग रग रगा
भरपूर भगा लडपुर लगा

ਜੁਬਾਨ ਦੇ ਜਿੰਦਰੇ ਜਾਚੇ ਜੋਏ ਜਾ
ਤੇ ਜਾਤ ਜਲਦੀ ਜਾਤਾਲਾ ਜੇ ਜਾਲੇ


ਅੰਨੇਵਾਹ ਬਲ ਮਤ
ਅਣ ਅੰਨ੍ਹਾ ਆਦਾ ਆ ਅਦਰ

यह-वोह

यह क्यो नही पडते वोह क्यो नही लादते
ये क्या पहना मेरे वाला मत क्या दहना
कितने क्यो अदर ना यू
बाहर बिखाये बतर त()र बू

सुहाना दिन-रात सफर
सासो सा सुदर ददर
इधर उधर के अदर मै डफ्फर
तेरा यू बाहर बूहे रफू चफ्फर

तूतू मै मै को मेरी चहुत चिता चा
जुबान जे जोड़ी जिनका जता जा

जाहिल जान जहान जी जू जान
जय जय जिले जो जताये जुबान

a to_ 2 _on

सोने का बल मत y-0-s inid
u is _aving भरपूर भा()राम


सृष्टि गोदी तो कभी सोई सी सही
ना कलयुग के कन्धार कही


हर रोज दिन मे भरपूर _uc_ear a-tom
और रात मे सपनो की _um _ar _a-ton

अब ज़मीन जे ज़ुबान जी जुस्की जुकली जक्ली

भट भट

ख़ाली खो भरपूर भहाना दुनिया का एक -एक नज़राना
अदर ना टिके दामाद दो देहर दुहाना
जल्दी जय जायो ज़ुबान जबाना
भरपूर भटर भाट भिखाना

यानी -नी

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इसी लिये घर बाहर बहाना लाना ला लारे लो ल()पकेगी
किधर

अंदर की शुरू कहानी कुरु कानी कन कमानी
वापस ना आयी ख़त्म खी खुरु खा-मानी
बाहर भरपूर गवाही ग्यानी गानी