पेट पा पडपूर पता
आधा जन्म का नाता
भरपूर भ्राता भता
Category: y-0-s unkno-n
re_id
s_@ a_ar_ness
_hi_ch sta_e th@ _asking 1 is re-si_ing
sa_er u _et _ae y _la_er _out lo_d la_er
_o_
dun_in d_ink th@ de_i d_et d@ _ip
w_a_t a _hang
0 stor_ache chan_ing
1 me_cy con_tant-ly
_leading _ang_ing
जू या
जुबान की जडपूर जात तो एक दूयीया
के अदर से भी-भी भरपूर बहुरि
चौक चय ना
दाग अच्छे है सफेदी सो सबाते सही
चौक चे चाक ची चिट्टिया चटाये
कहा के काया
भरपूर आदते मा-बाप नही बचपन से सिखाते
दूयीया के दाते दिखाते आखे खिलाते
और अदर भरपूर आ-वाज बहीखाते
फटा फास
पूजा की सासे कहा है कहे
गोल गोल पेट पे आस-पास
अच्छा तो फिर अदर कौन है
झुका ही
खू ले आम आधा किलो दो
बस इसके बाद-बम ने
ख़ाली दिन देखा ही ढैय्या ढो
भरपूर भेखा झोका झो
_et_er
कौन है क्यो कही से बेहतर
तहि तरा तो तारा तुम-हारा
मेरे जैसा कस(आ)यी क्यो कही
जतेरे जैसा जाये जला जहि
भरपूर जहर पे भरपूर भेट
और ख़ाली खैर पे लात मारो पेट
w_@ _ooming
आते दाल का दाव दालूम दया
उससे क्या
भरपूर को भाव ढूढना ढा ढढर

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