ससुरजी की सदके सडके
ऊपर दौडे घर की vi-fi तडके
क्या पकाया भरपूर भडके
खुला हो या बद दरवाजा
ताड ते तडपे
ससुरजी की सदके सडके
ऊपर दौडे घर की vi-fi तडके
क्या पकाया भरपूर भडके
खुला हो या बद दरवाजा
ताड ते तडपे
अदर नही मौत दुखती
बाहर क्या सौत सो सकती
ससुर जी को कौन रोके
दामाद की भरपूर बकती
जुबान का एक मरद शौचालय मे नही बैठ सकता
और दूयीया मे एक जुबान को फटा फट फकता
बाप रे बरद बो()ता बकता
जू खोटा
बाहर का पाप पाप पाप
खुशी से हुया अदर मिलाप
निकरे कितने काया काप
जो न झुका बुरा बाप
झुका आप
समय भाग रहा है और
तब क्या होता जब अदर
आ गया समय का सोता
तो बैठो आयना खो चला
टोटा
मौत की भरपूर नीद सोते
सुबह को बाहर भरपूर धोते
निखरी सास अन्नजल डूबोते
मौत का साया न साढे सोटे
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तुम्हारा घर चलता है भरपूर बहाने से
रोज के साढे तडके ताडने रुलाने से
समाज के बहाने अदर सास भूलाने से
लुढका शरीर इधर उधर छपकाने से
करमो से भरपूर अता
करमो से भरपूर खता
खडी भरपूर सास पूछे
बान के जू का पता
यता यता
काल को बाहर दौडाती
निखरी सास खूबसूरत बहती
अदर घुट घुट भिखरी भाटी
लेलो जिसे चाहिये चौधर चढाती
तहस नहस
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ਅਸੁਰ ਮੂਹ ਜਮੇ
ਆਖਾ ਭਨੇ
ਕੀ ਬਨੇ
ਬਨੇ
ਆਖਾ ਨੀ ਬਡ ਬਦ ਹੁਦਿਯਾ
ਘਸ ਘਸ ਅਦਰ ਵਦੀਯਾ
ਘੂਰ ਘੂਰ ਗੁਡਿਯਾ
ਵਜੇ ਵਿ(ਦ)ਗੀਯਾ
रोज रोज का कल-येश
sotot का स-देश
तूतू मै मै नही पहनती जूते
दामाद को ही पडे टूटे
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