जो आज्ञा भरपूर भय भाग्य
विधाता वायापुर राम राग्य
बनवास बाहर बाया बैराग्य
सासे सुदर सरनाम -योग्य
जो मै घर के अदर हू हो वोह क्या तुम बाहर तरू तूतू
समाज से सीख के आये घर के अदर भरपूर राय रू()रू
जब घरो-घरो मे अतर करते
तो घर के अदर ज()तर जय जानते
जो आज्ञा भरपूर भय भाग्य
विधाता वायापुर राम राग्य
बनवास बाहर बाया बैराग्य
सासे सुदर सरनाम -योग्य
जो मै घर के अदर हू हो वोह क्या तुम बाहर तरू तूतू
समाज से सीख के आये घर के अदर भरपूर राय रू()रू
जब घरो-घरो मे अतर करते
तो घर के अदर ज()तर जय जानते
सृष्टि मईया की गोदी से छीन कर
असुरो को भरपूर भरते भा
घर के अदर भरपूर अज्ञानी
और बाहर भरपूर घर आ ज्ञानी
एक मूह बारह आखे
रह रह बजाये बुरा बाखे
काया करे तेरा सलाखे
मेरा जवाख अदर चाखे
बाहर डाले गले दाखे
के-शव के अनु-सार
शव है अदर सास के
अनु का भरपूर विस्तार
तुम हारा तो सब कुछ तू-तू से शुरू होता
और हारा से अत आयी आता
फस गया आत()डी मे माता
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अरे यह क्या सास मरा हुया अदर नही
मारा हुया १/२ बाहर बाटे
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क्यो कही के क()रो मे
तूतू मै मै की जूतियो
जा जायज जाज जय
मा-बाप को क्या
सारा समाज सिर
सुदर सारता सा
तुम-हारे मूह से पहला शब्द शिकस्त शाकाल शिकला
_un-ty @tac un()कल
फैला फिसला फूला फिसला
कलयुग का कार(गार)नामा
जब अदर नही पहनता ऊपर
तो बाहर क्यो दिखाये निचे का घर नगा नुपुर
क्यो कही ने पैदा किया
b_a(बर)bo_s
बाहर सामने आने के लिये अदर का बहाना
घर के अदर किसने सिखाया
हल्ला-हेरि हाहा ह(प)ढ़ाया
मा-बाप निशाना भरपूर बनाया
अरे देखो आधे कब्र से उभर आया
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