0_ing _ess t_an su_1
wan_ mo_ than_ 0_ing _um
0_ing is in()id a_g_ry _um
Category: y-0-s unkno-n
पा पिया
पीठ पीछे क्यो कही रख के
सूर्य के सामने मोह का मूह रख के चलते है
तो आमने-सामने कहा मिलते है
सूर्य पीछे पलते पा
a pen_ up
not_ing is to_al-li tra_n_parent
ever-y1-thing is _er_orming in()id p@ent
or ho_sum _it-w_ong _ae ren_
sold & replace
(i)do u _av s_ill _ag on आधा जन्म
2 re_urn 0s tra_ma 2 re_lace
4 1 _ain सोमा
sea_ch y-0-s c_edit car_ kee_
u out of y ()sight yar_
सट्टी
गोदी की ज़मीन की मिट्टी झाड़ो
गदी न हो जाये चमडी नही
उझाडो असुरो की चिट्टी
आधा जन्म लुट्टी
भरपूर leo अमा-वस्या
सेर के मूछ मे स्वा सेर
किसने कमाया किस्मत का केर
अदर बाहर मेहर मा मेर
निगला नया नाम नर हनेर
_it on point

a dot in()id _ai_ing for dev()lop()ing
a gut surface()all in()divi_ual to _each
mi_d-fu_l_ess for dot tar_et
काया माया
दिन का खाया रात ने निभाया
सफेरे साया दिखाया भाया
अब क्यो रोदे राम राया
पीठ पीछे सब ने खाया
जिद्दी जैद
तुम तो दामाद के घर की चार-दिवाली मे कैद हो
तुम्हे क्या नजर आती बाहर की बट्टिया
बजर-बट्टू नवाब के वैद हो
_ack 2 _qu_ar 1
save soil
तर-सती ताखे स-लाखे
सूखी धरती पे नहीं उगेगा अन्न
दूयीया के एक एक की भरपूर
कोख भी सूखी _a_ch भूख भरेगी
घर के अदर जन न भरपूर बाहर जन

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