आत्मज्ञान मे सांसे का ना कोई ऊँचा ना कोई बड़ा बोई
ख़ाली ज्ञान के प्रवाह मे अंदर आ सांसे शर्मसार सोई
आत्मज्ञान मे सांसे का ना कोई ऊँचा ना कोई बड़ा बोई
ख़ाली ज्ञान के प्रवाह मे अंदर आ सांसे शर्मसार सोई
ज़मीन के हरे हारे
आसमान के तरे तारे
बीच मे मिले मझधारे
गोदी मे ख़ाली लुटाए
कलीरो कली कारे कारे
झलकते जीवो आत्मा आरे
un(0)doing
no()thing em_tee
2 si_ in()id _om
for b_eat_ing tr()ing ha_d
2 be to()tal in()id _oam
a lib()ration is 0 in()id p(ie)ace _arting s_eep
for b_eat_ing _eep _oing in()id _eep _weep
an em()tee 0 to()tal h()aven _on_ect
in()id por_al p_ime pav()n
ख़ाली सांसो का जहा()ज जी आधे आ घा()रा घर घा
आज कौन से ज़मीन-आसमान
मिलाने माया मय घेरा घा
गोदी आँखे ख़ाली खाम खेहती
एकांत न बोल सके वैसे सेहती
ऐसी शक्ति शांत-शाली शहती
माया मोह मोले मुख मा मेलती
no _an’ is_&
sh_nea gu()rees st_(8)&
a to()tal no()thing env()lop em_tee u
कुल देवी की ख़ाली कोख() शक्ति विजई भव:
शुन्या _ut का गुरु गोदी मईया के सिवाए
दुनिया के कौन से gut मे पैदा होगा
ख़ाली सांसो का सरूर सारा फिराए
सृष्टि गोदी की ख़ाली ज़मीन में
आत्मा(तत्व)शक्ति की जरूरत ख़ाली सांसे
अंदर-बाहर धहलती धारे ख़ाली झांसे
इधर-उधर अटकाए ख़ाली फाँसे
टेक टिकाएं दाएं-बाएं ख़ाली दिलासे
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