आधे पर तो फूल भी नहीं म()रता
और तुम्हारी दुनिया की तूतू में में ने
भरपूर ईंटे उठा के फेंकी
_it()er
qu_et or no_s
in()id
y
आधे पर तो फूल भी नहीं म()रता
और तुम्हारी दुनिया की तूतू में में ने
भरपूर ईंटे उठा के फेंकी
_it()er
qu_et or no_s
in()id
y
ख़ाली मुँह से निकले आधे बाण
भरपूर जू को आधा-आधे
चीर चारते चय
अब आज के अंदर चुपी भरने की
ठान ही ली है तो त्यार हो जायो
पुरानी यारियो के बीमे की एक-एक
भरपूर बात बैठी है सास के दामाद में
गले गल गलाने गे
आज के अंदर चुप बैठ के आंखे
किसका खौफ खायी खा ख़ाली
डंडे का मासूस तो ख़ाली
है ना
ध्यान धरे
आधे की मौत की ख़ाली()आई से भी
ख़ाली डंडे म()सूस नहीं होते
लता है असुरो के भरपूर गले सीधे नहीं उतरेंगे
निवाले की मौत को सीधा रास्ता पास्ता
तो तूतू में में की दुनिया में
एक ज़हर न हासता
आंधी के ३ अंदर
अंधी आंखे
बे()त-ल-ब कान
भरे भरपूर ज़ुबान
यही है पूरा इम्तिहान
न जाने कब आये
मेहमान की जान
जरा देखो तो gut गोदी का
ज़र्रा ज़र्रा है सारी पहचान
एक बटा दो
हां तो दो बटे दो लेके
ch_से मारोगे
आज के अंदर चुप बैठ के आंखे
किसका खौफ खायी खा
ख़ाली डंडे का मासूस
तो ख़ाली है ना
तर(पक)रकी रडकी तो वि-देश में
ही भरपूर होती है
or
ख़ाली तरे कच्ची gut में ख़ाली तैरती है
तुम्हारी भरपूर ज़ुबानों पे काले
ताले ना लगवा दीये
तो हमारा दाम भी gut गोदी का
ख़ाली एही & ख़ाली यही
&
तूतू मैं में की दुनिया ने ख़ाली आधे
का भरपूर मज(य-का)बूत बनाया
और आधा को घर के
अंदर भरपूर गिराया
str8
in()divid()ual
emptee breathing
half in half out
_hich is _hich _id
_ach as no _ach _om
in(out)id
You must be logged in to post a comment.