ख़ाली बूंदियो की ख़ाली gut मईया

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बाहे ख़ाली फैलाने से ख़ाली धड़ अपने आप उठता है


(हवा को ख़ाली चूमने को)


gut मईया की बूंदियो को ख़ाली गले में उतारने के लिये


जैसी gut मईया झुक के देखती है गोदी में बूंदियो को


बूंदिया भी रुक रुक के झुकती है गोदी की आँखों में gut मईया को

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गोदी के किराये-दर


आलीशान भरपूर घरो में जगह नही है ज़ुबान को बिठाने के लिये


बान को खुली छूट दे राखी है इधर उधर

भरपूर कर रखा है गोदी का ख़ाली दर


निकालो घर से बाहर भरपूर को
पर बाहर भी तो गोदी का अंदर है न


देखता हू कैसे डंग करते है gut मईया की गोदी को
एह तो gut मईया का आधे ही करेगा ख़ाली
आज का युग कहा गया
अब एह कल को कैसे आधे आज बनायेगा


निकालो मत सीधे भरपूर की दम को दबायो की दम दबा के

खुद ही फिसल जाये सिल के अदर

a full_ess re_ters _et ton()ue fli in()id _outh_ul ban()er

गोदी का किराये का घर मेरा होता है तो फिर तेरा कहा है भरपूर मगरूर

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टिके कान

भरपूर नाम बुंदिया बद का इम्तिहान

सांसे टिकने ना दे ज़मीन पर

टिके भारी इंतकाम

न लाये कोई ख़ाली मकान की पहचान

लकीरे है भरपूर लाभ की लम्बी लगाम

अंत कल कालीन

अब बतिआयो

कलयुग का अंत कल होगा

के आज कल भी देख गया न

नज़र गिराया हिसाब अंत भी

न जाने कल क्या होगा

नवाब का राज

आज तो शुरू करो

ख़ाली अंत का ख़ाली साज़