सुर-सागर मंथन

गोदी के अमृत के लिए


असुरो और सुरो के बीच में सुर-आ()गर मंथन


सुरो के हाथ है केतु की पूँछ (नहीं होगी सफ़ेद मूंछ) और असुरो के पास राहु की धड़

(आगे से पकड़ पीछे है जकड)


तभी तो जब-अब देखो


तूतू मे मे दुनिया का एक दिन तू खुद ही

सास की धड़ ख़रीदेगा या खरोंदेगा


अपवित्र असुर

घर के अदर ही सास रौदेगा

ख़ाली प-लड़ा -कु(बि)कारी

आधे दुनिया की भरपूर सडको की छाक छाली छान छा

और भरपूर सास का दामाद अदर ही एक इज़्ज़त

भरपूर मान बड़ा भाड़ा भरा भा

जल्दी से किराया ख़ाली करो नही तो लुटेगी बात


कलयुग का प-लड़ा है भारी

अंदर नहीं कन्या कोई कुँवारी

ख़ाली -खत

असुर भरपूर ताकत वाले वोट वा
अपनी अपवित्र आदतो से गोदी मे ही भरपूर तखत भरपूर भखते भा


देवो की अखंड मासुमियत सृष्टि गोदी में ख़ाली माँ

की सिफ़त के सदके सारा सार ख़ाली पवित्र पा

ख़ाली मा()मियत


अब क्या आधे की ख़ाली मा(न)सियत पे दिए ढ़ालने ढाए ढा


अ()ख़ना दिया ख़ाली है कि दूर मख्मूर

पर है कहा ख़ाली ि()यत नूर


आधे को सा(आ)मने आने की जरूरत तो ख़ाली खा अंदर


आधे न तो आगे न पीछे


न ऊपर न निचे

न इधर न उधर

धार ख़ाली भीतर ही भू-लाया

शुभ-लाभ ख़ाली गोदी सींचे सुर

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a s_ern @tu()n be_o-me _ated re_lit-ee of in()id _urn

for _e_t_une to a_in wiw o fe()n


as nothing within so without ever-i-thing

as ever-y-thing in()id so out()id nothing


no _@ter ever-y-thing u cre_ate f()om in()id _ind_ull_ess _ound

to()tal nothing re()_on-ates wit()in aum()tea ()ound

अ-ड़ा

आधे की सृष्टि मईया की गोदी में


दुनिया के सासो के भरपूर अमीर-गरीब का अदर एक साड़ा
तो सास ही बिना ()माने भरपूर घुट-घुट के अदर भरे एक भाड़ा


गोदी का अंदर तो है ख़ाली छोटा छूटा नाड़ा

ख़ाली ही रहे अंदर अ-खाड़ा

रामा, श्यामा आओ आमा

बैठे देखे ख़ाली बल की लकीरो

की सांसो का ख़ाली _ra()ma रा-ड़ा