सृष्टि मईया की गोदी अंदर आधे
ख़ाली महा(अनु-आन)बारक
सृष्टि मईया की गोदी अंदर आधे
ख़ाली महा(अनु-आन)बारक
०५=५०
ख़ाली चठ-बठ
ख़ाली आधा जन्म सृष्टि गोदी के अंदर दिन आधे अंदर रात
ख़ाली साँस n()w to()al आधे अठ अट अट
० नव-शिशु ५ इन्द्रियाँ _ut गोदी ख़ाली खट खट
काल के ख़ाली पुतले काला-काली कुल कठ कट कट
आँगन में बलाएँ बूंदियो की बठ बट बट
i am th@ w_ich is _ast no()thing
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eie aum th@ _hich is 0_ing now em_tee
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0 em_tee will an-no(y)thing ever-y1-t_ing
अब ला गोदी की क्यारी
साँस सरोवर सुरो सु-रा-री
रारी रात पिरोए बिंदी कुँवारी
साथ साथ साये नींदी न्यारी
उजळे आधे ऊ-ला आधा वरो वारी
मईया ने हाथ बांधे बरखाया
माखन इधर उधर गुर्राया
साँस की तरेडों तो ताली
तिल्ली ताया तर्राया
गोदी के काल्कि को है ना इंतज़ार
सृष्टि की कोख का ख़ाली खल कख-वार
तुम-हारे अदर भरपूर त्रिकाल का अंत-कार
ना लौटाए अंदर तरपूर तरो ताली ताल तार
नही आया य-कीन भरपूर भहाली बे-हाल ब-हार
अकलिष्ठा-कलिष्टा
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वैराग्य ख़ाली वही वि-योग अदर भरपूर भाग्य
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गोदी में अंनगिणत अन्न-गणित ख़ाली आधे
सृष्टि की कल्पना कागे ख़ाली खागे
अनंन्त में लींन आरे-वारे न्यारे नागे
ख़ाली ध्वनि धे धींन धन्धु धा धागे
काल्कि आधे बिंदु द्वार दहि दौड़ा दायाँ
आधे बिंदु आमने सारा दिन आज ख़ाली खाया
ख़ाली माँ का रात काला आधा सामने साया
आँखों में खूह खुला खंड खरपूर खमाया
सारथी सा साथ सखाया ख़ाली समाया
रिसकी राद में दिन रात ख़ाली खोए
वही सांसो के ख़ाली आँसू पिरोए
ख़ाली बंधन बांध भीतर भिगोए
साँस भी तैरे सारे असीस सोए
ख़ाली जोत गोदी की बहार बोए
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