गंजु

नन्दु तुम्हारे अंदर के किले की कला ख़ाली बंधु है

चारो और का ख़ाली यश भी मन मुघ्द ख़ाली संधु है

तो फिर गोदी की गंध भी ख़ाली सुगंध सिंधु है

आधे आम तो ख़ाली गेंदा गंजु है

ख़ाली निराली हमारी

आज की आंखे बंद करने का फायदा कोई क्या है

—–

व()न के भीतर शिकारी

है अंदर के भीखारी

आये है लूटने gut की क्यारी

अब तो एह कुड़ी नहीं 2()tal प्यारी

आई है कल के काल की ठुमारी

साध लो अंदर भरपूर बीमारी

अंदर बाहर ख़ाली खू-मारी

आ गई e-नर की ख़ाली कुमारी

सफ़ेद घोड़े पे सवार ख़ाली निराली हमारी

—–

बूंदियो का पहरा-वा ख़ाली

दोगुना बिठा दो