ख़ाली खंडे

आधे ख़ाली शैईया उठाने के कंधे नहीं है दुनिया के नेक बन्दे
बूंदिया ही लाए ख़ाली खंधे ख़ाली हो रुख्सत रहे राद द्रोण दे दंदे

ख़ाली रखने से गोदी गोत ख़ाली गति गा

माड़े क()मो को खरीदी बीमायारीयो की भरपूर कमायी दाता कोई सास अदर

जैसी अदर मोड़नी वैसी बाहर निचोड़नी
कहा है बिगड़ी होई भरपूर तोड़नी

विद्या-मथानी

श्री धन्वंतरि जी की विद्या-म()धानी को भरपूर बेचा और बिच-वायो


तभी तो इतनी बरकत बीमा(या)रियो के सवा()लो की बनायी और बनायो


विद्या तो खभी गहरी नहीं खो खक्ति खायो और खवायो


तो gut के तल के ऊपर ही भरपूर दामाद उडायो


सास तो भहरी ही भोती भरपूर भतायो


लुढ़क लुढ़क लरपूर लात लतायो

-वा(कम)ायी

सास की भरपूर आखो को म()दरमा घटता बढ़ता नज़र आता है
यह नहीं पता गोदी में एक-एक सूर्य भी एही करता है आधा दिन के अंदर


तुमहारी दवा की भरपूर आयी तो सास को gut के अदर गला नही सकती
तो क्या दवा को red भरपूर gala _ut करेगी
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बाहर भरपूर कामो के लिये उत्सुकता से उकसाते है
और अदर बचो की भरपूर वाट लगाते है
बेटा हम भी ऐसे ही पले बड़े है
भरपूर घर तो ऐसे ही एक भले भै
ख़ाली घर में क्या दीवारों से भरपूर सर फिरोयोगे
सास के अदर एक एक कैसे अड़ा-योगे

सुर-सागर मंथन

गोदी के अमृत के लिए


असुरो और सुरो के बीच में सुर-आ()गर मंथन


सुरो के हाथ है केतु की पूँछ (नहीं होगी सफ़ेद मूंछ) और असुरो के पास राहु की धड़

(आगे से पकड़ पीछे है जकड)


तभी तो जब-अब देखो


तूतू मे मे दुनिया का एक दिन तू खुद ही

सास की धड़ ख़रीदेगा या खरोंदेगा


अपवित्र असुर

घर के अदर ही सास रौदेगा

ख़ाली प-लड़ा -कु(बि)कारी

आधे दुनिया की भरपूर सडको की छाक छाली छान छा

और भरपूर सास का दामाद अदर ही एक इज़्ज़त

भरपूर मान बड़ा भाड़ा भरा भा

जल्दी से किराया ख़ाली करो नही तो लुटेगी बात


कलयुग का प-लड़ा है भारी

अंदर नहीं कन्या कोई कुँवारी

ख़ाली तारो रेश

गोदी तृप्ति तो ख़ाली घर से होती है
क्या तुम्हे भरपूर आखो से अज़र अहि आया


रा के केस भू(ल) गये ख़ाली संदेश
छूटे आदते भरपूर बने अंदर बेश
अदर न शरमाये बिखरे न वेश
भरपूर मे तो नही तत्वा तरेश

nit-वचन

जब जागो तूतू मे मे की दुनिया का एक लूट(ये)रा अदर ही लूटे रात का अधेरा


सौ सोनार की, एक लोहार की
ख़ाली लोहा सौ सोनारो का एक एक अंदर ही काटेगा

एक सोनार की, सौ लोहार की
दुनिया के अदर एक भरपूर का सोना सौ लोहारो को अदर ही बुझायेगा


बाहर आप कह के बुलाते
पाप अदर नही छूटे भरपूर लाते


एक हाथ से ताली नही तलती ता
हा तो दुनिया की भरपूर श(य्या)पथ एक सास के
साथ से ही ग्रह()न बही बरते बा