अब क्या आधे की ख़ाली मा(न)सियत पे दिए ढ़ालने ढाए ढा
अ()ख़ना दिया ख़ाली है कि दूर मख्मूर
पर है कहा ख़ाली ि()यत नूर
आधे को सा(आ)मने आने की जरूरत तो ख़ाली खा अंदर
आधे न तो आगे न पीछे
न ऊपर न निचे
न इधर न उधर
धार ख़ाली भीतर ही भू-लाया
शुभ-लाभ ख़ाली गोदी सींचे सुर

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