for u _in’t e*/i()ence no()thing
_et to com in()id o_hing
wit_in _ap of nat-ur to()tal s_ing
tran__end in(out)id em()tee _ing
for u _in’t e*/i()ence no()thing
_et to com in()id o_hing
wit_in _ap of nat-ur to()tal s_ing
tran__end in(out)id em()tee _ing
अब लताओं
आप कहते है की आ-दे पाप पे
नहीं नहीं ख़ाली मुखड़े का माप मे
अदर न आये भरपूर जू-लाप जे
a s_ern @tu()n be_o-me _ated re_lit-ee of in()id _urn
for _e_t_une to a_in wiw o fe()n
as nothing within so without ever-i-thing
as ever-y-thing in()id so out()id nothing
no _@ter ever-y-thing u cre_ate f()om in()id _ind_ull_ess _ound
to()tal nothing re()_on-ates wit()in aum()tea ()ound
श्री गणेश को विद्या-पढ़ाई का भगवन मानते है
और
सास के अदर विदाई की आई के आड़े नही भरपूर काटे
हठी दाते दिख(आ)वे के दाते दा
दिखावा क्या पड़()दा दा
आधे की सृष्टि मईया की गोदी में
दुनिया के सासो के भरपूर अमीर-गरीब का अदर एक साड़ा
तो सास ही बिना ()माने भरपूर घुट-घुट के अदर भरे एक भाड़ा
गोदी का अंदर तो है ख़ाली छोटा छूटा नाड़ा
ख़ाली ही रहे अंदर अ-खाड़ा
रामा, श्यामा आओ आमा
बैठे देखे ख़ाली बल की लकीरो
की सांसो का ख़ाली _ra()ma रा-ड़ा
आधा जन्म का एक (आ-जा)ना तो आगा ही रहेगा
शुन्य gut का भु(आ-ला)ना भरपूर एक-एक को ख़ाली रुलाएगा
हर आधा जन्म में
an in()id 0 re()ali_ation is de_th of भरपूर सास
2 in()id
bi()th ख़ाली si-l()nce रास
गोदी मईया रा १ आया है
आधे ईतय से आदि आरणि आ
0 mae _is em()tee f()og
gut ब्रह्माण्ड की शुन्य देवियाँ क्या भगवन की माँ नहीं होती जो ख़ाली() माँ को वर-दान भरती
शुन्य देवियों को पूजते नहीं सांसो में समाते सा बिना समाय
तो यह भगवन तक पहुँच ही नहीं सकते
सारी दुयाये अंदर भरपूर भार
अदर के कम-रो के क()मो को भोगने आये हो
अदर के बाहर
तो की सृष्टि गोदी के अंदर को रोगो गे
सास की अपवित्रता से असुर
तुम(अदर)हारी की भरपूर कर-तू-तो मे का प-रदा
भरपूर मा-बाप से छिप सकता है
गोदी की ख़ाली आहों से नहीं
You must be logged in to post a comment.