ख़ाली प-लड़ा -कु(बि)कारी

आधे दुनिया की भरपूर सडको की छाक छाली छान छा

और भरपूर सास का दामाद अदर ही एक इज़्ज़त

भरपूर मान बड़ा भाड़ा भरा भा

जल्दी से किराया ख़ाली करो नही तो लुटेगी बात


कलयुग का प-लड़ा है भारी

अंदर नहीं कन्या कोई कुँवारी

ख़ाली तारो रेश

गोदी तृप्ति तो ख़ाली घर से होती है
क्या तुम्हे भरपूर आखो से अज़र अहि आया


रा के केस भू(ल) गये ख़ाली संदेश
छूटे आदते भरपूर बने अंदर बेश
अदर न शरमाये बिखरे न वेश
भरपूर मे तो नही तत्वा तरेश

nit-वचन

जब जागो तूतू मे मे की दुनिया का एक लूट(ये)रा अदर ही लूटे रात का अधेरा


सौ सोनार की, एक लोहार की
ख़ाली लोहा सौ सोनारो का एक एक अंदर ही काटेगा

एक सोनार की, सौ लोहार की
दुनिया के अदर एक भरपूर का सोना सौ लोहारो को अदर ही बुझायेगा


बाहर आप कह के बुलाते
पाप अदर नही छूटे भरपूर लाते


एक हाथ से ताली नही तलती ता
हा तो दुनिया की भरपूर श(य्या)पथ एक सास के
साथ से ही ग्रह()न बही बरते बा

-रे

दुनिया मे तक()रीरो के घर लू(लु)टते लुटाते ला


बाहर तो कालरात्रि के चरचे चाली च


बाहर ही गिरे तारे अंदर तो बूंदियो के ख़ाली खारे


गोदी में उतरे खैर के खूब ख़ाली न्यारे

ख़ाली -खत

असुर भरपूर ताकत वाले वोट वा
अपनी अपवित्र आदतो से गोदी मे ही भरपूर तखत भरपूर भखते भा


देवो की अखंड मासुमियत सृष्टि गोदी में ख़ाली माँ

की सिफ़त के सदके सारा सार ख़ाली पवित्र पा

ख़ाली मा()मियत


अब क्या आधे की ख़ाली मा(न)सियत पे दिए ढ़ालने ढाए ढा


अ()ख़ना दिया ख़ाली है कि दूर मख्मूर

पर है कहा ख़ाली ि()यत नूर


आधे को सा(आ)मने आने की जरूरत तो ख़ाली खा अंदर


आधे न तो आगे न पीछे


न ऊपर न निचे

न इधर न उधर

धार ख़ाली भीतर ही भू-लाया

शुभ-लाभ ख़ाली गोदी सींचे सुर